अल्मोड़ा। लंबे समय से फरार चल रहे माओवादी भास्कर पांडे की गिरफ्तारी पूरे उत्तराखंड की पुलिस के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। इस चुनौती का सबसे बड़ा कारण था माओवादियों के कोड नाम को डिकोड करना। पहली बार अल्मोड़ा जिला पुलिस ने कोड को डिकोड कर 20 हजार के इनामी माओवादी को गिरफ्तार किया।
2004 के बाद से पकड़े गए माओवादियों ने अपने साथियों के कोड नाम उजागर किए थे जिन्हें डिकोड करने में उत्तराखंड पुलिस और खुफिया एजेंसियां असमर्थ साबित हो रहीं थीं। 2019 में खीमसिंह बोरा की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस के सामने छह माओवादियों के कोड नाम आए। 20 दिसंबर 2017 को एसओटीएफ ने सितारगंज थाने में 21 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया। इनमें से एसओटीएफ और पुलिस अब तक करीब 15 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। छह नाम ऐसे रह गए जिन्हें पुलिस अब तक डिकोड नहीं कर पाई थी। सूत्रों के अनुसार भास्कर पांडे की धरपकड़ में जुटी अल्मोड़ा जिला पुलिस के सामने काफी सुरागकशी के बाद एक नाम तरुण आया। माओवादी गतिविधियों की आशंका से पुलिस ने तरुण की निगरानी के लिए जाल बिछाया। काफी छानबीन के बाद पता चला कि भास्कर पांडे का ही कोड नाम तरुण है। कोड को डिकोड करने में सफलता मिलने के बाद पुलिस ने भास्कर पांडे की घेराबंदी करनी शुरू कर दी और अंत में उसको गिरफ्तार कर लिया।
भास्कर के पास संगठन में नहीं था कोई पद
अल्मोड़ा। 2016 में नानीसार में खोले जा रहे एक स्कूल के विरोध में कुछ माओवादियों के शामिल होने की सूचना पुलिस को मिली थी। इनमें अल्मोड़ा के जागेश्वर निवासी भास्कर पांडे का नाम भी सामने आया था। शुरुआती दौर में भास्कर के पास संगठन में कोई पद नहीं था, लेकिन संगठन उसे एक क्षेत्र से से दूसरे क्षेत्र में साहित्य आदि भेजने का काम देता था। भास्कर की सक्रियता को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने चार साल में उस पर इनाम ढाई हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये तक कर दिया।
इन क्षेत्रों में रहीं गतिविधियां
अल्मोड़ा। भास्कर पांडे को माओवाद की राह पर खीम सिंह बोरा लाया। बोरा ने महाराष्ट्र के प्रशांत सांगलेकर की मदद से अल्मोड़ा के दशाऊ गांव निवासी देवेंद्र चमियाल, लालकुआं निवासी रमेश भट्ट, गोपाल भट्ट, चंपावत के अनिल चौड़ाकोटी, काशीपुर के दिनेश पांडे, हल्द्वानी की चंद्रकला तिवारी और अल्मोड़ा की भगवती भोज को भी संगठन से जोड़ा। सितारगंज, खटीमा, अल्मोड़ा जिले के सोमश्वर, बाड़ेछीना, शहर फाटक और नैनीताल जिले के धारी, लालकुआं, चोरगलिया, पहाड़पानी क्षेत्र में इन लोगों ने माओवादी गतिविधियों को अंजाम दिया। अल्मोड़ा जिले के बिनसर अभयारण्य और सोमेश्वर की बोरारो घाटी आंदोलन में भी इन लोगों की सक्रिय भूमिका रही।
जंगलों में करता था पैदल सफर, शहर के साथ बदलता था नाम
अल्मोड़ा। अन्य माओवादियों की तरह ही भास्कर पांडे भी पुलिस से बचने के लिए शहर बदलता था। इस दौरान वह जंगल में 50 किमी तक का पैदल सफर कर लेता था। शहर बदलने के साथ ही भास्कर नाम भी बदलता था। पुलिस को भास्कर से बरामद आईडी में उसका नाम भुवन पांडे मिला। अल्मोड़ा में वह तरुण नाम से आता था। भास्कर संगठन के बताए कोड पर काम करता था और साथियों से संपर्क के लिए भी कोड का इस्तेमाल होता था।
पुलिस की सक्रियता से टला चुनावी खलल
अल्मोड़ा। आम तौर पर माओवादी गतिविधियां चुनाव के समय सबसे अधिक सामने आतीं हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी माओवादियों ने सोमेश्वर क्षेत्र में दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे और कुछ इलाकों में परचे भी वितरित किए। अब 2022 का विधानसभा चुनाव नजदीक है। ऐसे में माओवाद का गढ़ माने जाने वाले अल्मोड़ा जिले में इस दौरान माओवादियों के सक्रिय होने की आशंका थी। माना जा रहा है कि भास्कर पांडे की गिरफ्तारी से पुलिस ने बहुत बड़ा चुनावी खलल टाल दिया है।
आईबी, एलआईयू, तीन जिलों की पुलिस कर सकती है पूछताछ
अल्मोड़ा। माओवादी भास्कर पांडे की तलाश लंबे समय से तीन जिलों की पुलिस और खुफिया विभाग को थी। अल्मोड़ा में गिरफ्तारी के बाद अब इंटेलिजेंस ब्यूरो, एलआईयू और अल्मोड़ा के साथ ही नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले की पुलिस भी उससे पूछताछ कर सकती है। कहा जा रहा है कि पूछताछ के लिए बाहरी जिलों की कुछ खुफिया टीमें अल्मोड़ा के लिए रवाना भी हो चुकीं हैं।
बोरा के बाद भास्कर ही था बड़ा नाम
अल्मोड़ा। 2019 में लखनऊ एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए 50 हजार के इनामी माओवादी खीम सिंह बोरा के बाद उत्तराखंड में भास्कर पांडे ही माओवादियों में बड़ा नाम था। कुछ और नाम भी पुलिस जांच में आए थे पर इनमें सबसे अधिक सक्रिय भास्कर था। एजेंसियों का मानना था कि बोरा की गिरफ्तारी के बाद अकेला भास्कर ही कुमाऊं में माओवादी गतिविधियों को अंजाम दे सकता है। अब अल्मोड़ा पुलिस की इस कामयाबी से माना जा रहा है कि कुमाऊं में माओवादी गतिविधियों को कुछ हद तक विराम मिल सकता है।
बड़ी सफलता से प्रदेश में सुर्खी बने एसएसपी पंकज भट्ट
अल्मोड़ा। एक के बाद एक बडी सफलता हासिल कर अल्मोड़ा के एसएसपी पंकज भट्ट पुलिस महकमे के साथ ही पूरे प्रदेश में सुर्खियों में हैं। कुछ दिन पहले बागेश्वर जिले से अपहृत दो नाबालिगों को पंकज भट्ट के नेतृत्व में सकुशल बरामद किया गया था। अब लंबे समय से फरार चल रहे माओवादी भास्कर पांडे को अल्मोड़ा पुलिस ने पंकज भट्ट के निर्देशन में गिरफ्तार किया है। पुलिस के आला अधिकारी इसे अल्मोड़ा पुलिस की एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।