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Video: 'मां की रसोई, दादी की दाल...नाम रखने से कोई मम्मी नहीं बनता', अनोखे अंदाज में फूड डिलीवरी एप की क्लास

Wed, 23 Aug 2023 05:57 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

ऑनलाइन फूड डिलीवरी के बढ़ते चलन पर तंज कसते हुए और मौजूद परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कानपुर की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर काजल चौहान का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें काजल मजाकिया ढंग से कनपुरिया अंदाज में न केवल अपने बच्चों बल्कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप वालों की डांट लगा रही हैं। वीडियो को अब तक हजारों लोग देख चुके हैं।
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काजल चौहान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हम सब के लिए मां और उनके हाथ से बने खाने का स्थान कोई दूसरी चीज नहीं ले सकती। खाने के पीछे उनका अपने बच्चों के प्रति प्रेम भाव और अपार ममता होती है, जिसके मेल से खाने का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन आजकल जिस तरह से ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप का चलन बढ़ रहा है, उससे आज की युवा पीढ़ी घर के खाने से दूर होती जा रही है। इस चलन पर तंज कसते हुए और मौजूद परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कानपुर की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर काजल चौहान का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें काजल मजाकिया ढंग से कनपुरिया अंदाज में न केवल अपने बच्चों बल्कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप वालों की डांट लगा रही हैं। वीडियो को अब तक हजारों लोग देख चुके हैं।

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काजल वीडियो की शुरुआत में कहती हैं, 'आ गया पिज्जा, जब से ये ऑनलाइन बिकना शुरू हुआ है तब से तुम लोगों ने पूरी की पूरी जेनरेशन को बर्बाद कर दिया है। एक बार बटन दबाने की जरूरत है, चले आ रहे फटफटिया से फुर्र-फुर्र करते हुए। लो पिज्जा, लो बर्गर, लो चाउमीन...थोड़ा सा जहर भी दे दो। क्योंकि हमारा काम तो तुम लोगों ने खत्म कर दिया। मां की क्या जरूरत रह गई है। क्या करेंगे हम खाना बनाकर, क्योंकि इन लोगों ने खुद ही इतने रेस्त्रां खुल रखे हैं। मां की रसोई, मां की मिठाई, पापा का पनीर, दादी की दाल, खिलाओ भाई हम लोगों की जरूरत थोड़ी रह गई है। अपनी मां के हाथों का गले भी नहीं उतरता, लेकिन म्हरौली की मां की रसोई से दस-दस टाइम पकवान आ रहा है। 

उंगलियां चाट-चाटकर मजे ले-लेकर खाना खाया जा रहा है। लेकिन ऐसे में दूसरों को दोष देने से क्या फायदा जब, अपनी ही औलाद धूर्त निकल जाए। उन्होंने आगे फिल्मी गाने का जिक्र करते हुए कहा कि... वो गाने की लाइन नहीं है कि अपने ही गिराते हैं नशे मन पे बिजलियां, गैरों ने ही आकर थाम लिया है। अभी हम खाना बना कर दे दें तो अभी इस टुच्चे इंसान को एक मिनट नहीं लगेगा यह बोलने में कि मम्मी ऑयली है...मम्मी स्पाइसी है। बाहर से आ जाए खाना तो फिर देखो कैसे स्वाद ले लेकर खाता है नीच आदमी। फिर चार दिन के बाद आकर बोलेंगे कि मम्मी जिम तो जा रहे हैं पर पेट कम नहीं होता है। काजल आगे कहती हैं कि पेट ऐसे नहीं कम होता कि बाहर सें मंगाकर हड़िया-हड़िया भर खा लो फिर जिम में कसरत करो। जब तक बाहर का खाना नहीं छोड़ोगे तब तक कुछ कम नहीं होगा। मम्मी नाम रख लेने से कोई मम्मी नहीं बन जाता है। 
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