उत्तर प्रदेश की जिन 15 सीटों पर बुधवार को मतदान होना है उनमें से एक सुल्तानपुर भी है। लेकिन यहाँ न तो गांधी परिवार के सदस्य प्रचार कर रहे हैं और न ही भाजपा की तरफ़ से लड़ रहे गांधी नरेंद्र मोदी का ज़िक्र करते हैं।
सुल्तानपुर के मौजूदा सांसद संजय सिंह से जब बात हुई तो उन्होंने सुबह साढ़े नौ बजे घर आने का समय दिया। फ़िलहाल संजय सिंह 2009 में कांग्रेस के टिकट पर जीती हुई अपनी सीट त्याग कर राज्यसभा सांसद बन चुके हैं।
लेकिन 2014 आम चुनाव में इसी सीट से कांग्रेस ने उनकी पत्नी अमिता सिंह को टिकट देकर मैदान में उतारा है। अमिता का मुक़ाबला है मेनका और संजय गांधी के पुत्र और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार वरुण गांधी से।
'महाराज' और' रानी साहिबा'
अमिता सिंह पिछला विधानसभा चुनाव अमेठी से लड़ीं थीं और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। बहरहाल क़रीब दो घंटे इंतज़ार करने के बाद अमिता और संजय सिंह से मुलाक़ात हो सकी।
उन्होंने बताया, "जो बीत गया सो बीत गया। इन चुनाव में लोग कांग्रेस को ही जिताना चाहते हैं और हम यहां के लिए वो करके दिखाएंगे जो किसी ने सोचा तक नहीं है"।
अमिता सिंह इससे पहले विधायक रह चुकी हैं और फर्राटेदार अंग्रेज़ी में बात करना पसंद करतीं हैं। उनके पति संजय सिंह अमेठी राजघराने के हैं और यहाँ के लोग इन्हें 'महाराज' और' रानी साहब' कह कर संबोधित करते हैं।
ये बात और है कि सुल्तानपुर शहर मेँ जिन लोगों से बात हुई थी उनका कहना था कि जो लोग राजपरिवार के होते हैं उनसे आम आदमी आसानी से नहीं मिल सकते।
चुनावी मुद्दा जाति-धर्म से परे
वैसे सुल्तानपुर लोकसभा सीट हमेशा से नेहरू-गांधी परिवार के लोगों के लिए ख़ास रही है। इसके अगल-बगल वाली अमेठी और रायबरेली सीटों पर मौजूदा सांसद राहुल-सोनिया गांधी हैं। लेकिन इस बार पीलीभीत की अपनी लोकसभा सीट छोड़ कर वरुण गांधी यहाँ कांग्रेस से लोहा लेने पहुँच चुके हैं।
पिछले एक महीने के प्रचार में 400 जनसभाएं कर चुके वरुण गांधी यहाँ लोगों से भाजपा या नरेंद्र मोदी पर कम और अपने कांग्रेसी पिता संजय गांधी की ज़्यादा बात करते हैं।
उनकी मां मेनका गांधी भी उनके चुनाव क्षेत्र में प्रचार करके रविवार को ही लौटीं हैं। बीबीसी से हुई बातचीत में वरुण ने साफ़ किया कि वे जाति और धर्म को मुद्दा बनाकर सुल्तानपुर के लोगों से वोट नहीं मांग रहे।
मोदी के ज़िक्र से बचते हैं गांधी?
वरुण गांधी ने कहा, "मैं धर्म-निरपेक्षता की बात करता हूँ जिससे पूरे क्षेत्र का समुचित विकास संभव हो सके। मेरे साथ युवा वर्ग भी है और बुज़ुर्ग भी हैं क्योंकि पिछले कई दशकों से सुल्तानपुर का न तो विकास हुआ है और न ही लोगों की ज़िंदगियाँ बेहतर हुईं हैं"।
वरुण गांधी अपने भाषणों में एक-आधा बार गुजरात के विकास का ज़िक्र तो कर चुके हैं लेकिन वे नरेंद्र मोदी का नाम लेने से बचते रहे हैं।
हालांकि सच ये भी है कि भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी का नाम लिए बिना अपनी लोकप्रियता बढ़ाने वाले कम ही नेता इन चुनावों में हिस्सा लेते दिखे हैं। सुल्तानपुर से समाजवादी पार्टी नेता शक़ील अहमद और बहुजन समाज पार्टी ने एक ज़माने में 'दबंग' कहे जाने वाले पवन पांडे को मैदान में उतारा है।
हालांकि दिलचस्प बात ये भी है कि न तो राहुल-प्रियंका-सोनिया गांधी ने अमेठी से महज़ 35 किलोमीटर दूर इस क्षेत्र आकर अमिता सिंह के लिए प्रचार किया है और न ही मोदी ने वरुण गांधी के लिए।