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सांस्कृतिक राजधानी काशी में राजा-रजवाड़ों की धरोहर, जानना है इतिहास तो रामनगर किले में जरूर जाएं

Sat, 18 May 2019 02:02 PM IST
गीतार्जुन गौतम पूजा सिंह, अमर उजाला, वाराणसी
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रामनगर किला - फोटो : अमर उजाला
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संग्राहलय एक ऐसी जगह है, जहां पूरा इतिहास समाया होता है। वहां पर पुराने समय से जुड़ी वस्तुओं को जानने का अवसर मिल जाता है। वाराणसी का रामनगर किला भी कुछ ऐसा ही इतिहास बयां करता है। यहां हम काशी के राजा रजवाड़ों की शानों शौकत को देख सकते हैं।

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सभ्यताओं का संगम हो या ऐतिहासिक बेशकीमती मुद्राएं। संग्रहालय में स्वर्ण्म इतिहास से लेकर वर्तमान तक का सफर करने का मौका मिलता है। संग्रहालय में रखी वस्तुएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर और प्रकृति को प्रदर्शित करती हैं। 

रामनगर किले का ये है इतिहास :
गंगा के पूर्वी तट पर 1742 में राजा मंशाराम द्वारा रामनगर किला स्थापित किया गया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अन्य देशी रियासतों की भांति यहां भी राजतंत्र की समाप्ति हो गई और बनारस स्टेट, देशी रियासत का भी भारतीय गणराज्य में विलय हो गया।
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रामनगर दुर्ग में संग्रहीत अति दुर्लभ कलाकृतियों को सुरक्षित रखने के विचार से महाराजा विभूति नारायण सिंह ने दुर्ग के अंदर ही एक संग्रहालय में समस्त राजसत्ता और राज परिवार की कलाकृतियों को कई वीथिकाओं में सुसज्जित कराकर रखा था।

संग्राहलय की ये हैं खास बातें

संग्राहलय में रखी तोप - फोटो : अमर उजाला
रामनगर संग्रहालय में खूबसूरती से नक्काशी की गई बालकानी, भव्य मंडप और खुले आंगन का भव्य रूप देखने को मिलता है। इसके साथ ही संग्रहालय में कई प्राचीन वस्तुओं का नायाब कलेक्शन है।

इनमें प्राचीन घड़ियां, पुराने शास्त्रागार, तलवारें, पुरानी बंदूकें, विनटेज कार और हाथी के दांतों की बग्गी, पालकी और हाथी के दांत के कई सामानों के साथ ही कई तरह के वाद्ययंत्र शामिल हैं।

इसके साथ ही शाही परिवारों के मध्ययुगीन वेशभूषा, आभूषण और फर्नीचर आदि पर कई गई उम्दा कारीगरी का नमूना भी है। यहां मध्यकालीन युग के राजा-रजवाड़ों की शानों शौकत का भी नजारा देखने को मिलेगा।

खगोलीय घड़ी है आकर्षण का केंद्र :
सबसे अद्भुत वो दुर्लभ खगोलीय घड़ी है जो ना केवल समय बताती है, बल्कि साल, महीना, सप्ताह और दिन के साथ-साथ सूर्य, चंद्र और अन्य ग्रहों का खगोलीय विवरण भी देती है। इस घड़ी का निर्माण वर्ष 1852 में बनारस के शाही दरबार के खगोलविद मूलचंद ने किया था। 
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किले का निर्माण 

इस किले का निर्माण 17वीं शताब्दी में राजा बलवंत सिंह ने कराया था। यह महल काशी नरेश का शाही निवास था। इस संग्रहालय का सबसे अहम हिस्सा विद्या मंदिर है, जो शासकों के काल की अदालत का प्रतिनिधित्व करता है। इस किले में रखी तोप, चांदी का सिंहासन और कई ऐसी चीजें हैं जो अंग्रेजों के समय की याद दिलाती हैं। 

और कुछ खास :
रामनगर किले में स्थित सरस्वती भवन में मनुस्मृतियों, पांडुलिपियों, विशेषकर धार्मिक ग्रंथों का दुर्लभ संग्रह सुरक्षित है। यहां गोस्वामी तुलसीदास की एक पांडुलिपि की मूल प्रति भी रखी है। यहां मुगल मिनियेचर शैली की बहुत सी पुस्तकें रखी हैं, जिनके आवरण पृष्ठ काफी सुंदर हैं। 

अंतररार्ष्ट्रीय संग्रहालय दिवस का इतिहास
18 मई को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जाता है। संग्रहालयों की विशेषता और उनके महत्व को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 1983 में 18 मई को अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया था। इसका उद्देश्य आम जनता में संग्रहालयों के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें संग्रहालयों में जाकर अपने इतिहास को जानने के प्रति जागरूक बनाना है।
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