रामनगर संग्रहालय में खूबसूरती से नक्काशी की गई बालकानी, भव्य मंडप और खुले आंगन का भव्य रूप देखने को मिलता है। इसके साथ ही संग्रहालय में कई प्राचीन वस्तुओं का नायाब कलेक्शन है।
इनमें प्राचीन घड़ियां, पुराने शास्त्रागार, तलवारें, पुरानी बंदूकें, विनटेज कार और हाथी के दांतों की बग्गी, पालकी और हाथी के दांत के कई सामानों के साथ ही कई तरह के वाद्ययंत्र शामिल हैं।
इसके साथ ही शाही परिवारों के मध्ययुगीन वेशभूषा, आभूषण और फर्नीचर आदि पर कई गई उम्दा कारीगरी का नमूना भी है। यहां मध्यकालीन युग के राजा-रजवाड़ों की शानों शौकत का भी नजारा देखने को मिलेगा।
खगोलीय घड़ी है आकर्षण का केंद्र :
सबसे अद्भुत वो दुर्लभ खगोलीय घड़ी है जो ना केवल समय बताती है, बल्कि साल, महीना, सप्ताह और दिन के साथ-साथ सूर्य, चंद्र और अन्य ग्रहों का खगोलीय विवरण भी देती है। इस घड़ी का निर्माण वर्ष 1852 में बनारस के शाही दरबार के खगोलविद मूलचंद ने किया था।
इस किले का निर्माण 17वीं शताब्दी में राजा बलवंत सिंह ने कराया था। यह महल काशी नरेश का शाही निवास था। इस संग्रहालय का सबसे अहम हिस्सा विद्या मंदिर है, जो शासकों के काल की अदालत का प्रतिनिधित्व करता है। इस किले में रखी तोप, चांदी का सिंहासन और कई ऐसी चीजें हैं जो अंग्रेजों के समय की याद दिलाती हैं।
और कुछ खास :
रामनगर किले में स्थित सरस्वती भवन में मनुस्मृतियों, पांडुलिपियों, विशेषकर धार्मिक ग्रंथों का दुर्लभ संग्रह सुरक्षित है। यहां गोस्वामी तुलसीदास की एक पांडुलिपि की मूल प्रति भी रखी है। यहां मुगल मिनियेचर शैली की बहुत सी पुस्तकें रखी हैं, जिनके आवरण पृष्ठ काफी सुंदर हैं।
अंतररार्ष्ट्रीय संग्रहालय दिवस का इतिहास
18 मई को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जाता है। संग्रहालयों की विशेषता और उनके महत्व को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 1983 में 18 मई को अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया था। इसका उद्देश्य आम जनता में संग्रहालयों के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें संग्रहालयों में जाकर अपने इतिहास को जानने के प्रति जागरूक बनाना है।