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विसरा जांच: लैब में स्टॉफ की कमी से जांच में हो रही देरी,मायूस होते हैं पूर्वांचल के लोग

Mon, 02 Dec 2019 12:03 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : a
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बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के फोरेंसिक विज्ञान विभाग में एक कमरे में विसरा एकत्र कर रखे जाने की एक बड़ी वजह प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों सहित अन्य स्टाफ की कमी है। रामनगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अफसरों की मानें तो स्टाफ की संख्या बढ़ेगी तो विसरा की जांच में तेजी आएगी और संदिग्ध हाल में हुई मौतों की वजह जल्द स्पष्ट हो सकेगी।

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बीएचयू में सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर के कारण यहां वाराणसी के अलावा पूर्वांचल, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश से भी लोग उपचार के लिए आते हैं। कई लोग ऐसे होते हैं जिनकी मौत उपचार शुरू करते ही हो जाती है और मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाती है। इसके अलावा जिले में भी जहर खाने या अन्य संदिग्ध कारणों के चलते लोगों की मौत होती रहती है। पोस्टमार्टम में जिसकी भी मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाती, उसका विसरा सुरक्षित रख कर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है।

रामनगर विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अफसरों के अनुसार विसरा की जांच के लिए दो वरिष्ठ वैज्ञानिक और चार वैज्ञानिक होने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है और इसके आधे ही स्टाफ है। इसी तरह से जांच में सहयोग करने वाले स्टाफ की भी कमी है। इसके चलते जांच में देरी लगती है। हालांकि जिस प्रकरण को पुलिस जरूरी बताती है या अदालत का आदेश रहता है, उसकी जांच प्राथमिकता के आधार पर करके रिपोर्ट दी जाती है।

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Lab Technicians

12 प्रयोगशालाएं और खुलनी हैं प्रदेश में

रामनगर विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अफसरों के अनुसार मौजूद समय में प्रदेश में इस तरह की छह प्रयोगशालाएं हैं। आगामी दिनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में 12 ऐसी ही प्रयोगशालाएं खोलने का प्रस्ताव है। प्रदेश भर में प्रयोगशालाओं की संख्या 18 हो जाएगी तो विसरा की जांच में समय नहीं लगेगा।

पुलिस को देखते रहना चाहिए कौन से विसरा काम के नहीं

वैज्ञानिकों के अनुसार जिला पुलिस को बीच-बीच में यह देखते रहने चाहिए कि बीएचयू के फोरेंसिक विज्ञान विभाग में रखे हुए कौन से विसरा काम के हैं और कौन काम के नहीं रह गए हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि जांच के बाद भी विसरा फोरेंसिक विज्ञान विभाग में जार में रखे रह जाते हैं। समय-समय पर इसकी तस्दीक कर यदि निष्प्रयोज्य विसरा को नष्ट करा दिया जाए तो सही रहेगा।
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