बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के फोरेंसिक विज्ञान विभाग में एक कमरे में विसरा एकत्र कर रखे जाने की एक बड़ी वजह प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों सहित अन्य स्टाफ की कमी है। रामनगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अफसरों की मानें तो स्टाफ की संख्या बढ़ेगी तो विसरा की जांच में तेजी आएगी और संदिग्ध हाल में हुई मौतों की वजह जल्द स्पष्ट हो सकेगी।
बीएचयू में सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर के कारण यहां वाराणसी के अलावा पूर्वांचल, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश से भी लोग उपचार के लिए आते हैं। कई लोग ऐसे होते हैं जिनकी मौत उपचार शुरू करते ही हो जाती है और मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाती है। इसके अलावा जिले में भी जहर खाने या अन्य संदिग्ध कारणों के चलते लोगों की मौत होती रहती है। पोस्टमार्टम में जिसकी भी मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाती, उसका विसरा सुरक्षित रख कर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है।
रामनगर विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अफसरों के अनुसार विसरा की जांच के लिए दो वरिष्ठ वैज्ञानिक और चार वैज्ञानिक होने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है और इसके आधे ही स्टाफ है। इसी तरह से जांच में सहयोग करने वाले स्टाफ की भी कमी है। इसके चलते जांच में देरी लगती है। हालांकि जिस प्रकरण को पुलिस जरूरी बताती है या अदालत का आदेश रहता है, उसकी जांच प्राथमिकता के आधार पर करके रिपोर्ट दी जाती है।