मणिकर्णिका घाट महाश्मशान में मसाने की होली पर उमड़ी भीड़।
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भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाएं बिरिज के गोरी, धन-धन नाथ अघोरी दिगंबर खेलैं मसाने में होरी। महाश्मशान में जहां राग और विराग एकाकार हुए। वहीं, ब्रज की होली के रंग भी बिखरे। भूत भावन महादेव जब होली खेलने निकले तो शिवगणों की भी होली हो ली। मणिकर्णिका तीर्थ पर स्थित महाश्मशान अनोखी होली का साक्षी बना।
आतुर शिवगणों का उल्लास चरम पर
एक तरफ धधकती चिताएं तो दूसरी तरफ अपने आराध्य संग होली खेलने को आतुर शिवगणों का उल्लास देखते ही बन रहा था। महाश्मशान की होली में इस बार ब्रज के रंग भी घुल गए। चिता भस्म के साथ हवा में उड़ रहे गुलाल ने पूरे माहौल में राग, विराग, प्रेम और उल्लास के रंग घोल दिए। जलती चिताओं की परिक्रमा करने के बाद बाबा मसान नाथ का आशीर्वाद लेकर चिता भस्म की होली शुरू हुई तो बस सब शिव के रंग में रंगे नजर आ रहे थे।
मसाने की होली खेलने की परंपरा निभाई गई
बाबा की नगरी काशी में रंगभरी एकादशी के अगले दिन महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली खेलने की परंपरा निभाई गई। मान्यता है कि चिता भस्म की होली बाबा मसान नाथ को प्रसन्न करने के साथ ही शुरू हो जाती है। मसान नाथ की पूजा के बाद दोपहर में रंगों के साथ चिता भस्म की होली मणिकर्णिका घाट पर शुरू हुई तो शिव की नगरी रंगों में डूब गई।
युवाओं में देश प्रेम भी है और परिवार प्रेम भी
मसान होली के आयोजक गुलशन कपूर ने बताया कि जो अघोरी हुआ करते थे, वो ऐसे लोग थे जिनका अपने घर परिवार और गृहस्थ जीवन से मन भर जाता था। वे लोग शिव और उनकी भक्ति में विलीन हो जाना चाहते थे, लेकिन आज का युवा वर्ग सब कुछ करना चाहता है। यंग जेनरेशन धर्म भी करना चाहती है और कर्म भी। युवाओं में देश प्रेम भी है और परिवार प्रेम भी है।