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पूर्वांचल में थमी भाजपा की हवा, आजमगढ़ और गाजीपुर में सपा ने किया क्लीन स्वीप, भाजपा को सात सीटों का नुकसान 

Fri, 11 Mar 2022 12:29 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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bjp and sp - फोटो : amar ujala
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भाजपा का मजबूत गढ़ बन चुके पूर्वांचल में इस विधानसभा में लहर से अलग ही सियासी हवा बही है। यही कारण है कि पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम से अलग ही तस्वीर उभर कर सामने आई है। यहां सपा गठबंधन ने अपनी पैठ मजबूत की है, जबकि बसपा की जमीन ही पूरी तरह से दरक गई है और वह महज एक ही सीट पर सिमट गई है।

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जबकि कांग्रेस अपना खाता खोल पाने में भी नाकाम रही है। सत्ता का रुख तय करने वाली पूर्वांचल की धरती का मिजाज थोड़ा बदला हुआ नजर आया है। विकास और राष्ट्रवाद के साथ मजबूती से खड़ी पुरबिया  माटी के मतदाताओं ने बदलाव को भी थोड़ी तरजीह दी। यही कारण है कि भाजपा और सपा के बीच छिड़ी सीधी जंग के बीच सपा को यहां फायदा मिला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के विकास का सीधा फायदा पड़ोसी जिले मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली को मिला है। यही कारण है कि वाराणसी के साथ पड़ोसी जिलों में भाजपा ने अपने पुराने प्रदर्शन को बरकरार रखा है और दो अन्य जिलों में क्लीन स्वीप के जरिए विकास का बड़ा संदेश दिया है।

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जबकि जातीय समीकरणों को साधने में सफल रहने के चलते सपा ने आजमगढ़ और गाजीपुर में सभी 17 सीटें जीत ली हैं। जबकि बलिया और जौनपुर में अपने पुराने प्रदर्शन को सुधारते हुए अपने पक्ष में माहौल बनाया है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक पूर्वांचल में मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण, यादव मतों के साथ पिछड़े मतों में सेंधमारी में सपा कुछ हद तक सफल रही।

हालांकि भाजपा ने पूर्वांचल में बसपा के मतों को अपने पाले में करने में पूरी सफलता पाई है। यही कारण है कि बसपा अपने बेस वोट को भी सहेज नहीं पाने के कारण यहां की सियासत से ही विलुप्त सी हो गई है। यहां बता दें कि वर्ष 2014 से ही पूर्वांचल ने भाजपा का साथ थाम लिया था।

उस वक्त भाजपा की सुनामी के बीच भी सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ को अपना कर्मक्षेत्र बनाया था और इस सीट को सपा के पास सहेज दिया था। इसके बाद वर्ष 2017 में आजमगढ़ की 10 में एक सीट पर ही भाजपा जीत पाई थी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के इस मजबूत गढ़ की कमान राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने हाथ में ली थी।

सुभासपा से गठबंधन कर मजबूत हुई सपा

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
पूर्वांचल में सपा ने भाजपा की बराबरी का प्रदर्शन किया है। इसके पीछे भाजपा और सुभासपा के बीच गठबंधन को भी बड़ी वजह माना जा रहा है। राजभर बहुल विधानसभाओं में सपा ने प्रदर्शन सुधारा है और कई जगहों पर जीत भी दर्ज की है।

इसके अलावा बांदा जेल में बंद मऊ सदर विधायक व माफिया मुख्तार अंसारी परिवार को भी साथ रखने का फायदा सपा को मिला। इस परिवार ने दो सीटों पर जीत के साथ ही अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों के मुस्लिम मतों को सपा के पाले में सहेजा है।

पूर्वांचल को अब पसंद नहीं हैं बाहुबली

विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल ने बड़ा संदेश देते हुए बाहुबलियों को नकार दिया है। ज्ञानपुर से चार बार विधायक रहे जेल में बंद विजय मिश्र तीसरे नंबर पर खिसक गए। जौनपुर की मल्हनी से मैदान में उतरे पूर्व सांसद धनंजय सिंह भी सपा के लकी यादव से पिछड़ गए। हालांकि कुछ जगहों पर बाहुबली जनता के समर्थन से विधानसभा पहुंचने में सफल भी हुए हैं।

पूर्वांचल के जिले एक नजर में

सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
  • वाराणसी, 8 सीट सभी भाजपा ने जीतीं
  • आजमगढ़, 10 सीट, सपा-सुभासपा (सभी सीटें जीतीं)
  • बलिया, 7 सीट, भाजपा (2), सपा-सुभासपा (4), बसपा (1)
  • मऊ , 4 सीट, भाजपा (1), सपा-सुभासपा (3),
  • गाजीपुर, 7 सीट, सपा-सुभासपा (7),
  • सोनभद्र, 4 सीट, भाजपा (सभी सीटें जीतीं)
  • मिर्जापुर, 5 सीट, भाजपा (सभी सीटें जीतीं)
  • जौनपुर,  9 सीट, भाजपा (4), सपा-सुभासपा (5),
  • चंदौली, 4 सीट, भाजपा (3), सपा-सुभासपा (1),
  • भदोही, 3 सीट, भाजपा (2), सपा-सुभासपा (1), 

प्रमुख प्रत्याशी जीते 

नीलकंठ तिवारी, रविंद्र जायसवाल, अनिल राजभर, दयाशंकर सिंह, उमाशंकर सिंह, ओमप्रकाश राजभर, अब्बास अंसारी, दारा सिंह चौहान, रमाकांत यादव, दुर्गा प्रसाद यादव, संग्राम यादव, आलम बदी, भूपेश चौबे, लकी यादव, जगदीश नारायण राय, दीनानाथ भास्कर, रत्नाकर मिश्र, रमाशंकर सिंह पटेल, सुशील सिंह, गिरीश चंद्र यादव
 
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प्रमुख प्रत्याशी हारे 

आनंदस्वरूप शुक्ल, रामगोविंद चौधरी, अजय राय, नारद राय, उपेंद्र तिवारी, सुरेंद्र सिंह, शादाब फातिमा, अलका राय, गुड्डू जमाली, धनंजय सिंह, , शैलेंद्र यादव ललई, विजय मिश्र, रविंद्रनाथ त्रिपाठी, मनोज सिंह डब्लू, राजेश मिश्रा, अरविंद राजभर, सुरेंद्र सिंह पटेल, संगीता बलवंत
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