बीएचयू अस्पताल में घटिया प्रबंधन का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इमरजेंसी वार्ड को ले लें। यहां मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण बेडों की संख्या कम पड़ जा रही है। इसके चलते मरीजों को लगातार स्ट्रेचर पर भर्ती होकर इलाज कराना मजूबरी बन गई है। जबकि सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में खाली पड़े 330 बेड बेहतर विकल्प हो सकते हैं। लेकिन बीएचयू प्रशासन व अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
रविवार को भी अन्य दिनों की तरह इमरजेंसी वार्ड के बाहर और अंदर स्ट्रेचर की कतार लग रही है। दोपहर में वार्ड में दोनों तरफ से लगे बेड के बीच में पांच मरीज स्ट्रेचर पर भर्ती हुए। वहीं दो मरीज गलियारे में और दो मरीज इमरजेंसी वार्ड के गेट पर स्ट्रेचर पर भर्ती रहे। बता दें कि इमरजेंसी में 100 बेड हैं। पंद्रह दिन से मरीजों की संख्या बढ़ी हैं। हर दिन औसतन 100 से अधिक मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इसमें डॉक्टर की सलाह पर गंभीर मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है, लेकिन बेड के संकट की वजह से स्ट्रेचर पर इलाज कराना उनकी मजबूरी है।
काउंटर पर पर्चा बनवाने के लिए लगी कतार
रविवार को दोपहर 12 बजे अस्पताल में इमरजेंसी के पर्चा काउंटर पर पंजीकरण कराने वालाें की लाइन लगी रही। यहां बिहार, आजमगढ़, मऊ आदि जगहों से मरीज आए तो परिजनों ने पहले उन्हें इमरजेंसी में पर्चा बनवाकर दिखाया, बाद में चिकित्सक ने भर्ती करने की बात कही तो उसी स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर वार्ड में पहुंचे, मगर यहां बेड नहीं मिला।