वाराणसी। डीएवीपीजी कॉलेज के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की ओर से चल रहे 14 दिवसीय ई कार्यशाला के पांचवें दिन पुरातात्विक स्थलों के बारे में चर्चा की गई। बीएचयू प्राचीन इतिहास विभाग की प्रो. सुमन जैन ने कहा कि यूपी के जौनपुर में मादरडीह नामक पुरा स्थल में पिछले कुछ महीनों में रजत लिपित तांबे के सिक्के मिले। यहां पूर्व प्रतिहारों का 50 सिक्कों का जो ढेर मिला, वह आकार में छोटा है और देखने में सुंदर नहीं है।
प्रो. सुमन जैन ने कहा कि सिक्कों पर सासैनियन वंश द्वारा जारी गधैया सिक्कों की छाप दिखाई देती है। इनका वजन 3 से 5 ग्राम है। लगभग सभी सिक्के लेखयुक्त हैं, जिन पर श्री श्री विग्रह, श्री वि लेख मिलता है। लेखन शैली के आधार पर इन सिक्कों की तिथि 9वीं, 10वीं शताब्दी ई. दिखाई पड़ती है। लेखन शैली उत्तर भारतीय है जो इस काल में प्रचलित कुटिल और नागरी लिपि से मेल खाती है। अभिलेख चूंकि प्रतिहार मिहिरभोज का है। ऐसे में इस बात की बहुत संभावना है कि ये सिक्के प्रतिहारों के हो। ऐसा लगता है कि ये सिक्के व्यापार के जरिये जौनपुर पहुंचे होंगे। संचालन डॉ. प्रशांत कश्यप और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में डॉ. सीमा, डॉ. ओम प्रकाश कुमार, डॉ. विनय कुमार, डॉ. सचिन तिवारी, डॉ. राजेश कन्नौजिया, डॉ. दुष्यंत शाह, डॉ. शोभनाथ पाठक मौजूद रहे।