विश्व के नाथ बाबा विश्वनाथ सावन के तीसरे सोमवार को अपने अद्भुत स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। भक्त भगवान शिव के अर्द्धनारीश्वर स्वरूप के दर्शन करेंगे। खास बात यह है कि भगवान शिव का यह स्वरूप भक्तों के लिए होता है। मनुस्मृति के अनुसार महादेव ने स्वयं को दो भागों में विभक्त करके अर्द्धनारीश्वर स्वरूप के दर्शन कराए थे।
विश्वनाथ गली व्यवसायी संघ के नेतृत्व में
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सावन के तीसरे सोमवार पर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक बेहद खास रहा। लंबे अंतराल के बाद देश की 12 पवित्र नदियों और तीन सागर के जल से अभिषेक किया गया। सावन के तीसरे सोमवार पर परंपरागत रूप से विश्वनाथ गली व्यवसायी संघ द्वारा बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया गया।
विश्वनाथ गली व्यवसायी संघ के नेतृत्व में होने वाले जलाभिषेक में इस बार 12 नदियों जिनमें गंगा के अलावा यमुना, सरस्वती (त्रिवेणी-संगम), कावेरी, ताप्ती, ब्रह्मपुत्र, अलकनंदा, वरुणा, गोदावरी, क्षिप्रा, सिंध, कृष्णा, नर्मदा के साथ ही तीन महासागरों महानद (गंगासागर), अरब-सागर के साथ ही हिंद-महासागर का जल मंगाया गया था। शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 11 वैदिकों द्वारा पूजन कराया गया।
जलाभिषेक के लिये विश्वनाथ गली के व्यापारी सुबह आठ बजे चितरंजन पार्क पर इक्कठा हुए। डमरूओं की गड़गड़ाहट और शंख ध्वनि करते हुए व्यापारियों का समूह परंपरागत मार्ग सिंहद्वार (डेढ़सीपुल) से साक्षी-विनायक होते हुए गेट नं.-1 ढुंढिराज गणेश से विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने पहुंचा।
सावन में काशीपुराधिपति की नगरी बम-बम
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कोरोना काल और बाबा विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद सावन में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वालों का रेला उमड़ पड़ा। 14 जुलाई से 31 जुलाई तक 45 लाख से अधिक शिवभक्त बाबा के दरबार में दर्शन के लिए पहुंचे हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार केवल दोनों सोमवार को ही 11 लाख से अधिक शिवभक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया।