बाबा विश्वनाथ का श्रृंगार करते रोहित माली
- फोटो : अमर उजाला
बाबा विश्वनाथ का दरबार सजा रहे रोहित माली की चार पीढि़यां श्रद्धा भाव से यही काम करती आ रही हैं। पांचवीं पास रोहित का कहना है कि बाबा विश्वनाथ का ही आशीर्वाद है जो उनके परिवार को यह सौभाग्य मिला है। वह बचपन से ही अपने पिता सत्यनारायण वर्मा के साथ बाबा के मंदिर में सजावट का काम करते आ रहे हैं। इसके पहले उनके दादा नन्हकू माली और परदादा रामप्रसाद बाबा के धाम को सजाते थे। रोहित ने बताया कि शयन आरती के बाद वह बाबा का श्रृंगार शुरू करते हैं। इसमें उनके भाई कृष्णा वर्मा भी सहयोग करते हैं।
रुद्राक्ष और फूलों से सजाया गया मंदिर परिसर
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बाबा बटुक भैरव, मां संकठा देवी के साथ ही शहर के अन्य मंदिरों में भी रोहित व उनका परिवार ये काम करता है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में शृंगार के बाद वह मां विंध्यवासिनी के धाम में श्रृंगार के लिए जाएंगे। एक सितंबर को माता के जन्मोत्सव पर माताजी का श्रृंगार होगा।
अर्धनारीश्वर स्वरूप में बाबा विश्वनाथ ने श्रद्धालुओं को दिए दर्शन
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि में सावन के आठ सोमवार पर भगवान के अलग-अलग स्वरूप में दर्शन हो रहे हैं और यह पहला मौका था। 10 जुलाई को पहले सोमवार पर बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का श्रृंगार, दूसरे सोमवार को गौरी-शंकर स्वरूप में श्रृंगार, तीसरे सोमवार को अमृत वर्षा श्रृंगार और चौथे सोमवार को बाबा का भागीरथी श्रृंगार हुआ।
पांचवें सोमवार को तपस्यारत पार्वती श्रृंगार, छठवें सोमवार को शंकर-पार्वती और गणेश श्रृंगार और सातवें सोमवार को अर्द्धनारीश्वर स्वरूप में भगवान शिव ने भक्तों को दर्शन दिए। अंतिम सोमवार को रुद्राक्ष शृंगार होगा। फिर 30 अगस्त को काशीपुराधिपति को काशी की जनता झूला झुलाएगी और बाबा का झूला श्रृंगार होगा।