रजा पर्व की पांचवीं शाम कबीर के नाम रही। 16वीं सदी के महान श्रमसधाक संत निर्गुण रचनाओं को सुरों और नृत्य ने सगुण स्वरूप दिया। बृहस्पतिवार को पांचवीं शाम में लोहटिया स्थित रूपवाणी स्टूडियो में युवा कबीरपंथी साधुओं के बैंड तानाबाना ने कबीर के निर्गुण पदों की प्रस्तुति की। गिटार और डफली की धुनों की संगत में कबीर के पदों को दर्शकों साकार सगुण स्वरूप में महसूस किया।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए युवा नर्तकी प्रशस्ति तिवारी ने कथक में कबीर की कविता पर प्रस्तुति दी। प्रशस्ति की प्रस्तुति में कथक नृत्य के साथ बनारस घराने के संगीत और कथक नृत्य की झांकी भी थी। आशीष मिश्र की आवाज में प्रशस्ति के कबीरी नृत्य का जादू दर्शकों के लिये सम्मोहक था। आचार्य विवेकदास ने कहा कि मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा सच है मृत्यु। इसलिए हमें जन्म और जीवन को लेकर झूठे मोह और वृथा अहंकार में नहीं रहना चाहिये। इसके पूर्व रूपवाणी के स्टूडियो थिएटर में दोपहर ढाई बजे से जानेमाने चित्रकार और कलागुरु प्रो. सुरेश के नायर ने नगर के विद्यार्थी चित्रकारों को चित्रकला की बारीकियों से परिचित कराया। संयोजन, संचालन व अतिथियों का स्वागत व्योमेश शुक्ला ने किया।
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