पांडेय परिवार की छठीं पीढ़ी कर रही रक्षा
रामलीला के व्यास परंपरा को पांडेय परिवार की छठीं पीढ़ी निभाती आ रही है। उन्हीं को 200 साल से पुरानी श्रीरामचरितमानस पोथी की रक्षा की जिम्मेदारी मिली है। पांडेय परिवार में पं. स्वयंवर प्रसाद पांडेय, पं. पदारथ पांडेय, पं. क्षत्रपाल पांडेय, पं. अनिरुद्ध पांडेय, पं. लक्ष्मीनारायण और पं. हृदय नारायण पांडेय हैं।
काष्ठ जीह्वा स्वामी ने दिया था लीला को आकार
पं. रामनारायण पांडेय ने बताया कि चुनार के पर्वतों पर तपस्या के बाद 1795 में रामनगर के गिरीजा देवी मंदिर में विश्राम करने पहुंचे काष्ठ जीह्वा स्वामी के काशी नरेश ने दर्शन किए थे। उन्हें किले में ले गए। तबसे दरबार में सप्त ऋषियों के रखने की परंपरा शुरू हुई थी। काष्ठ जीह्वा स्वामी ने 108 ग्रंथों की रचना की और रामनगर की रामलीला के स्वरूप व स्थलों का नामांकरण किया था।