फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दूसरे जुमे पर भी मस्जिदों में सन्नाटा, घरों में अदा हुई जोहर की नमाज

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। लॉकडाउन-3 के दौरान रमजान का दूसरा जुमा भी घरों में इबादत के साथ ही बीता। बीते सालों की तरह इस बार न तो हलचल दिखा, न उत्साह। इस बार इत्र की खुशबू से गलियां भी नहीं महकीं। मस्जिदों में पूरी तरह से सन्नाटा छाया रहा। हां, ये जरूर था कि लोगों में इबादत का पूरा हौसला था। लोगों ने अपने अपने घरों में जोहर की नमाज अदा की। कुरान पाक की तिलावत के साथ कोरोना से निजात की दुआओं का सिलसिला जारी रहा। शाम को इफ्तार करने के बाद भी बारगाहे इलाही में इसी दुआ के साथ लोगों ने सजदा किया और दुआएं मांगी।
विज्ञापन

हर साल रमजान में जुमे के दिन खासी रौनक देखने को मिलती थी। मस्जिदें तो नमाजियों से ऐसी भर जाती थीं कि देर से पहुंचने वालों को सीढि़यों, दलानों में जगह मिलती थी। लकदक सफेद कलफ लगे कुर्ते, शेरवानी, पायजामे, पठानी पहने जब बड़ों से लेकर नौजवान और बच्चे नमाज के लिए निकलते तो वाकई वो मंजर नूरानी होता था। अब तो न मस्जिदों में जुमे की तकरीर हो रही है और ना ही आलिमों के खुत्बे। महज चार से पांच लोग मस्जिदों में नमाज अदा कर रहे हैं। खैर कोरोना की वबा से बचने का एक यही तरीका भी है। दूसरे जुमे पर लोगों ने पूरी सादगी के साथ घरों में ही नमाज अदा की। कई नन्हे बच्चों ने जुमे के दिन रोजा रखा। उनकी रोजा कुशाई के लिए घरों में अम्मी ने लजीज खाने-पीने की चीजें बनाईं। चूंकि इफ्तार के वक्त की गई दुआएं कुबूल होती हैं तो बच्चों और बड़ों ने मिलकर कोरोना से निजात के लिए दुआएं मांगी।
कई मस्जिदों में खत्म हुई तरावीह
वाराणसी। चौदह रमजान शुक्रवार को कई मस्जिदों में पंद्रह दिन की होने वाली तरावीह की नमाज भी पूरी हो गई। तरावीह की नमाज में पूरी एक कुरान मुकम्मल कराकर हाफिजों ने तरावीह की नमाज पूरी की। जामा मस्जिद नदेसर, नगीना मस्जिद रेवड़ी तालाब, नूरी मस्जिद अशफाकनगर समेत कई मस्जिदों में पंद्रह दिन की तरावीह की नमाज चल रही थी, जो शुक्रवार को पूरी सादगी से मुकम्मल कराई गई। इसके बाद से यहां ईद के चांद दिखने तक सूरह तरावीह का सिलसिला चलेगा।
विज्ञापन

सादगी से मनाएं ईद, मजलूमों की ज्यादा से ज्यादा करें मदद
वाराणसी। जमीअत उलमा-ए-बनारस ने सभी मुसलमानों से अपील की है कि इस साल ईद मुख्तसर और सादगी से ही मनाएं। दुनिया जिस मुश्किल दौर में गुजर रही है, उसमें ये सही भी नहीं है कि ईद की खुशियां मनाई जाएं। वो भी तब जब बहुत से लोग परेशान हाल हैं। हमें अपने खर्च में कटौती कर मजबूर और परेशान हाल लोगों की मदद करनी चाहिए। ज्यादा से ज्यादा सदका और खैरात गरीबों और मजलूमों में बांटे। जनरल सेक्रेटरी अबू शहमा नोमानी ने अपील की कि मुसलमान बाजार जाने से परहेज करें। अगर बहुत जरूरी हो तो पूरे सुरक्षात्मक उपायों के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। अपने की भी हिफाजत करें और दूसरों को भी महफूज रखें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें