उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति 2018 में पूर्वांचल को पर्यटन हब बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। इसमें यहां के प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों को आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और ईको टूरिज्म, तीन आधार पर विकसित करने की योजना है।
इतना ही नहीं, विभिन्न क्षेत्रों के हस्तशिल्प को पर्यटन से जोड़ने का खाका तैयार किया जाएगा। वहीं क्रूज, वाटर स्पोर्ट्स व पारंपरिक खेलों और खान-पान के माध्यम से देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने पर जोर दिया गया है।
वाराणसी के सारनाथ में वर्ल्ड बैंक की मदद से प्रो-पूअर प्रोजेक्ट में तेजी लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया है। पर्यटकों की सुविधा के लिए टूरिस्ट फेसिलिटेशन सेंटर गोरखपुर और वाराणसी में बनाया जाएगा।
ईको टूरिज्म के लिए कैमर सैंक्चुअरी मिर्जापुर, सुरहा ताल सैंक्चुअरी बलिया को उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से विकसित किया जाएगा। इसके अलावा बनारस और गोरखपुर में तीन स्तर पर पर्यटन को विकसित करने की तैयारी है।
वाराणसी में आध्यात्मिक पर्यटन के अंतर्गत सारनाथ, ज्वाला देवी शक्तिपीठ, विंध्याचल विंध्यवासिनी वहीं, ऐतिहासिक पर्यटन के लिए रामनगर किला, मिर्जापुर, चंदौली जिले में विजयगढ़ किला, अघोरी किला, सिंगरौली दुर्ग, भिटारी को पर्यटन सुविधाओं से युक्त किया जाएगा।
हेरिटेज टूरिज्म के तहत सारनाथ, काशी के घाट, विंध्य क्षेत्र को भी सुविधा युक्त करना है वहीं ईको पर्यटन के तहत चंद्रप्रभा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, सुरहा ताल वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी, कैमूर, हथियानाला ईको प्वाइंट, राजदरी, देवदरी, चूनादरी, मुक्खादरी, सिरसी फॉल, रिहंद बांध, सोन व्यू प्वाइंट, सलखान फोसिल पार्क को विकसित किया जाना है।
वहीं, गोरखपुर में कुशीनगर, अयोध्या, बखीरा सैंक्चुअरी, सोहागी बारवा सैंक्चुअरी, सुहेलवा वाइल्ड लाइफ, पार्वती आरंगा वाइल्डलाइफ, वेट्सलैंड इन बलरामपुर को भी वीकेंड पर छुट्टियां मनाने वालों को केंद्र में रख कर तैयार किया जाएगा।