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वाराणसी: आत्मनिर्भर युवा का प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर बढ़ाया हौसला, मोती की खेती कर पेश की मिसाल

Tue, 15 Sep 2020 09:32 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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मोती की खेती करते श्वेतांक। - फोटो : अमर उजाला
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आत्मनिर्भर बनने की चाहत गहराती है तो वह किसी भी तरह से अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है। कुछ समय पहले तक वाराणसी के चौबेपुर इलाके के नरायनपुर गांव के रहने वाले श्वेतांक पाठक ने भी ये बातें कहीं पढ़ी थी। इसी को गांठ बांधकर उन्होंने मोती (सीप) की खेती शुरू की। शुरुआत में उन्होंने आलोचना सही लेकिन अब प्रधानमंत्री ने ट्विटर के जरिए इस युवा की सराहना की है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर नरायनपुर गांव के रहने वाले श्वेतांक पाठक एमए और बीएड पास कर मोती की खेती कर रहे हैं। श्वेतांक पाठक ने बताया कि वह कुछ अलग करना चाह रहे थे, इसके लिए उन्होंने इंटरनेट का सहारा लिया और खेती की नई-नई तकनीक के बारे में जानकारियां जुटाते रहे।

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इसी दौरान उनको मोती की खेती के बारे में पता चला। उन्हें लगा कि काफी कम पैसे और नाममात्र की जगह में यह काम किया जा सकता है। बस फिर क्या था उन्हें ये आइडिया जंच गया। उन्होंने बेसिक ट्रेनिंग ली और मोती की खेती करनी शुरू कर दी।

श्वेतांक इस बात से भी खुश हैं कि उन्होंने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्र में एक बदलाव की शुरुआत की।

ऐसे होती है मोती की खेती
मोती एक प्राकृतिक रत्न है। जो सीप में पैदा होता है। भारतीय बाजारों में इसकी मांग को बढ़ता देख अंतरराष्ट्रीय बाजारों से इसकी आपूर्ति की जाती है। प्राकृतिक रूप से एक मोती का निर्माण तब होता है, जब एक बाहरी कण जैसे रेत, कीट आदि किसी सीप के अंदर प्रवेश कर जाते हैं या अंदर डाले जाते हैं। और सीप उन्हें बाहर नहीं निकाल पाता।

जिसकी वजह से सीप को चुभन पैदा होती है। इस चुभन से बचने के लिए सीप अपने अंदर से रस (लार जैसा लिक्विड) स्राव करती है। जो इस कीट या रेत के कण पर जमा हो जाती है। इस प्रकार उस कण या रेत पर कई परत जमा होती रहती है। इस तरीके को प्राकृतिक मोती उत्पादन में इस्तेमाल किया जाता है। ये कैलशियम कार्बोनेट, जैविक पदार्थों पानी से बना होता है।

मुनाफे का सौदा है मोती की खेती
श्वेतांक पाठक इसे अधिक मुनाफे का सौदा बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोती की खेती शुरू करने के लिए पहले तालाब या हौज में सींपो को इकट्टा करना होता है। इसके बाद छोटी सी सीप में शल्य क्रिया के बाद इसके भीतर 4 से 6 मिमी व्यास वाले साधारण डिजाइनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, ओम, स्वास्तिक वाली आकृतियां डाली जाती हैं।

फिर सीप को बंद किया जाता है. लगभग 8 से 10 माह के बाद सीप को चीर कर डिजाइनर मोती निकाल लिया जाता है। इससे गमले, गुलदस्ते, मुख्य द्वार लटकाने वाली सजावटी झुमर, स्टैंड, डिजाइनिंग दीपक आदि तैयार किया जाता है। इसके कवर को आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग में लाया जाता है। जिससे इसका पाउडर तैयार किया जाता है।
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प्रधानमंत्री के ट्वीट पर जताई खुशी
प्रधानमंत्री के ट्वीट से श्वेतांक पाठक काफी खुश है। उन्होंने बताया कि इसकी खेती शुरू की तो शुरुआत में थोड़ी मुश्किल जरूर आई। कुछ लोगों ने इसे काफी प्रेरक बताया तो कुछ लोगों ने इसकी आलोचना भी की। अब कम आमदनी में ज्यादा मुनाफा के लिए लोगों को मोती की खेती के लिए जागरूक करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने पर्सनल ट्वीट हैंडल से ट्विट किया है कि नरायनपुर गांव में मोती की खेती करने वाले तीन युवाओं ने हर किसी के लिए एक मिसाल पेश की है। इन युवाओं ने यह दिखाया कि अगर सही दिशा में परिश्रम हो तो मिट्टी से मोती उगाए जा सकते हैं। वहीं रिलायंस की नौकरी छोड़कर इस काम में लगे रोहित आनंद पाठक व मोहित पाठक प्रधानमंत्री के ट्वीट पर खुशी का इजहार किया है।
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