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करपात्री महाराज की स्मृति में जारी हुआ डाक टिकट

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रक्षा मंत्रालय भवन में डाक विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की स्मृति में पांच रुपये मूल्य का डाक टिकट जारी किया। मुख्य अतिथि राजनाथ सिंह ने कहा कि स्वामी करपात्री महराज अखंड भारत के द्रष्टा थे।
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नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि करपात्री महराज ने जीवन भर समाज में सद्भाव स्थापना के लिए प्रयास किया। युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा की भारत सरकार ने गो रक्षक धर्म सम्राट स्वामी करपात्री महराज के स्मृति में डाक टिकट जारी कर सभी सनातनियों का सम्मान बढ़ाया है। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा व पर्यटन विभाग के राज्य मंत्री अजय भट्ट, संचार विभाग के राज्य मंत्री देबु सिंह चौहान, सीपीएमजी मंजु कुमार, महावीर प्रसाद जयपुरिया, अनुराग जयपुरिया समेत अन्य लोग मौजूद रहे। वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि पांच रुपये का डाक टिकट वाराणसी प्रधान डाकघर(विश्वेश्वरगंज) में बिक्री के लिए उपलब्ध है।
लंबे इंतजार के बाद सरकार ने किया धर्मसम्राट का स्मरण
भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म की ध्वजा फहराने वाले धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज पर डाक टिकट जारी होने पर सनातनधर्मियों में हर्ष का माहौल है। धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सरकार ने धर्मसम्राट को स्मरण किया है। सरकार की यह पहल प्रशंसनीय है। स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने 17 साल से सिर्फ वादे किए जा रहे थे लेकिन आज केंद्र सरकार ने धर्मसम्राट पर टिकट जारी करके लंबे समय से चली आ रही मांग को पूर्ण किया है।
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उन्होंने कहा कि इस देश में धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, गो हत्या बंद हो, गोमाता की जय हो, संविधान शास्त्रीय हो, मंदिर मर्यादा सुरक्षित शास्त्रोनुमोदित हो... यह उद्घोष आज सकल विश्व में गूंज रहे हैं। यह धर्मसम्राट की ही देन है। शिक्षा क्षेत्र में धर्मसंघ शिक्षा मंडल की स्थापना उनकी ही देन है। ऐतिहासिक गोरक्षा आंदोलन से उन्होंने आम जनता को जागृत किया। योग्यता होने के बाद भी 165 सालों से रिक्त ज्योतिष्पीठ पर स्वयं विराजमान ना होकर उन्होंने गुरुदेव स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज को सुशोभित कराया।
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