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वाराणसी : पूर्वांचल की पहली सिग्नेचर बिल्डिंग ‘शिव के डमरू’ का ब्लू प्रिंट देखेंगे पीएम मोदी, लखनऊ में होगा प्रेजेंटेशन

Fri, 01 Oct 2021 09:33 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार इस प्रजेंटेशन के ब्लू प्रिंट की तैयारी देखने शुक्रवार को वाराणसी पहुंचे। वीडीए की ओर से संचालित होने वाले अन्य परियोजनाओं की वस्तु स्थिति से भी उन्हें अवगत कराया गया है।
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पूर्वांचल की पहली सिग्नेचर बिल्डिंग का स्वरूप - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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वाराणसी कमिश्नरी कंपाउंड में प्रस्तावित शिव के डमरू रूप में बनने वाली पूर्वांचल की पहली सिग्नेचर बिल्डिंग का प्रजेंटेशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच अक्तूबर को देखेंगे। लखनऊ में आयोजित होने वाले आजादी के अमृत महोत्सव में इसका प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। वाराणसी के अधिकारियों ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। उधर, प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार इस प्रजेंटेशन के ब्लू प्रिंट की तैयारी देखने शुक्रवार को वाराणसी पहुंचे। 

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वीडीए की ओर से संचालित होने वाले अन्य परियोजनाओं की वस्तु स्थिति से भी उन्हें अवगत कराया गया है। उधर, फाइनल डीपीआर में इस योजना की लागत अब 324.88 करोड़ हो गई है। वीसी ईशा दुहन ने बताया कि वीडीए की ओर से तैयार होने वाले इस प्रोजेक्ट को सीएम योगी आदित्यनाथ को दिखाया जा चुका है। अब पीएम को इसका प्रस्तुतीकरण दिखाया जाएगा। वीसी ने बताया कि यह बिल्डिंग पूरी तरह से इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के मानक पर होगी। इसके निर्माण की प्रक्रिया के लिए सीएम के अलावा मंडलीय व राज्य स्तरीय समिति ने भी सहमति दे दी है। लखनऊ में आयोजित होने वाला कार्यक्रम नगर विकास विभाग की ओर से आयोजित होगा।

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फाइनल डीपीआर में 325 करोड़ की लागत

वीसी ईशा दुहन ने बताया कि ऊर्जा संरक्षण के साथ ही यह भवन पूरी तरह से मानव-पर्यावरण के अनुकूल होगा। 324.88 करोड़ की लागत से बनने वाले इस भवन की प्लेटिनम रेटिंग की जाएगी। इसके लिए आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) मांगी गई है। करीब 50 हजार वर्गमीटर के निर्मित क्षेत्र वाले इस भवन में विभिन्न इलाकों में काम कर रहे 45 सरकारी विभाग शिफ्ट होंगे। कमिश्नरी के बगल में बनने वाले इस स्थल पर दो टावर आमने-सामने बनेंगे। दोनों टावर ग्रीन बिल्डिंग के मानक पर होंगे।

मानव पर्यावरण के अनुकूल होगा भवन
वीसी ईशा दुहन ने बताया कि ऊर्जा संरक्षण के साथ ही यह भवन पूरी तरह से मानव-पर्यावरण के अनुकूल होगा। 324.88 करोड़ की लागत से बनने वाले इस भवन की प्लेटिनम रेटिंग की जाएगी। इसके लिए आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) मांगी गई है। करीब 50 हजार वर्गमीटर के निर्मित क्षेत्र वाले इस भवन में विभिन्न इलाकों में काम कर रहे 45 सरकारी विभाग शिफ्ट होंगे। 
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