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गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, हिंदू पढ़ रहे उर्दू, मुस्लिम ले रहे संस्कृत की तालीम

Sun, 19 Jan 2020 12:01 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी अब्दुल हक अंसारी, अमर उजाला, जौनपुर
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हिंदू छात्रा पढ़ा रही उर्दू - फोटो : ं
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‘मैं हिंदू हूं, तू मुस्लिम है, हैं दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूं, तू पढ़ मेरी कुरान...’ जौनपुर जिले के केराकत के चंवरी मदरसे से गंगा-जमुनी तहजीब की कुछ ऐसा ही हो रहा है। बीस वर्ष पुराने इस मदरसे में हिंदू बच्चे उर्दू की तालिम ले रहे हैं तो मुस्लिम बच्चे संस्कृत पढ़ रहे हैं। खास बात यह कि संस्कृत की पढ़ाई मुस्लिम शिक्षक कराते हैं। प्रेम-सौहार्द बांटते इस मदरसे में बच्चों की संख्या सवा तीन सौ से अधिक है, जिसमें 35 फीसदी गैर मुस्लिम हैं।

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जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर थानागद्दी-जलालपुर मार्ग पर स्थित चंवरी गांव में हाजी शेर अली ने वर्ष 1999 में मदरसे की बुनियाद डाली थी। फिलहाल उर्दू बोर्ड से हाईस्कूल की मान्यता वाले इस मदरसे में 325 बच्चे हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए प्रधानाचार्य समेत कुल 19 शिक्षकों की नियुक्ति है। इसमें 11 मुस्लिम तो आठ हिंदू हैं।

रोजाना सुबह स्कूल खुलने पर बच्चे व शिक्षक प्रार्थना लब पे आती है दुआ बनकर तमन्ना मेरी और सारा जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा... गीत गुनगुनाते हैं। मदरसे से हाईस्कूल की शिक्षा ग्रहण कर चुका छात्र मो.निसार अहमद सऊदी की मक्का यूनिवर्सिटी में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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मुस्लिम छात्रा पढ़ा रही संस्कृत - फोटो : ं
कुलदीप यादव और रोहित यादव इंजीनियर हैं, किरन यादव पुलिस, पूजा यादव शिक्षक हैं। प्रधानाचार्य ईशा सल्फी का कहना है कि बच्चों का सर्वांगीण विकास मुख्य मकसद है। कोशिश यही है कि यहां से बच्चे अच्छे इंसान बनकर निकलें।

ग्राम प्रधान केवल पत्ती देवी ने बताया कि गांव में शुरू से ही समरसता का भाव है। हिंदू-मुस्लिम के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता। जिला पंचायत सदस्य नीलू जायसवाल ने कहा कि जाति-धर्म के नाम पर समाज में वैमनस्यता फैलाने वालों को इस मदरसे से सीख लेनी चाहिए।
 
जिले में कई अन्य मदरसे भी हैं, जहां हिंदू-मुस्लिम दोनों वर्ग के बच्चे शिक्षा ले रहे हैं। चंवरी मदरसा भी उनमें एक है। सामाजिक सद्भाव को मजबूती देने वाले ऐसे संस्थानों को बढ़ावा देने की जरूरत है।
कमलेश कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
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