समय से वितरण की बजाए कूड़े के ढेर में दवाओं को फेंकने के बाबत जब अमर उजाला ने जिम्मेदारों से सवाल किया तो वह जवाब देने से हिचकने लगे। बीईओ आरएन पाठक का कहना था कि विभाग को जो भी दवा मिली थी, उसका शत-प्रतिशत वितरण कर दिया गया। खंडहर भवन में पहले सीएचसी संचालित था, लिहाजा दवा उन्हीं की हो सकती है। शिक्षा विभाग का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उधर, सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.अंशुमान मिश्र का कहना था कि स्कूलों में दवा वितरण के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को दिया गया था। उन्होंने क्यों नहीं बांटा, जानकारी नहीं है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
इन कक्षाओं में बंटनी थी दवा
डब्लूआईएफएस जूनियर टेबलट कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को वितरित किया जाना था। वहीं डब्लूआईएफएस दवा कक्षा-6 से 12 तक की छात्राओं में दिया जाना था। गर्भवती महिलाओं में एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगाया जाना था।