मध्यवर्गीय परिवार से होने की वजह से नौकरी हासिल करने के लिए खेलना शुरू किया, लेकिन जैसे-जैसे खेल में उतरने लगा हॉकी मुझमें उतरने लगी। यूपी कॉलेज से खेलना शुरू किया था। जीत की भूख इतनी कि दिन में तीन-तीन घंटे अभ्यास करता था। उक्त बातें ललित उपाध्याय ने बातचीत में कही।
खेल प्रेमियों के स्वागत से अभिभूत ओलंपियन ने कहा कि काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद रहा तो ओलंपिक में पदक का रंग भी बदलेगा। भारतीय हॉकी में लगातार निखार आ रहा है। सेमीफाइनल में हार निराशाजनक थी, लेकिन टीम इससे उबरी और पदक हासिल किया। दो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने का सिलसिला काशी विश्वनाथ के आशीर्वाद से संभव हुआ है। उन्होंने कहा, हार के बाद कमियों को दूर करने पर खूब अभ्यास करता हूं।