बेटियां अनमोल, इनका नहीं कोई मोल...। ये बातें हर माता-पिता के जुबां पर रविवार को थीं। सभी अपनी बेटी के साथ डॉटर्स डे की यादें संजोकर रखना चाहते थे। कई माता-पिता तो अपनी बेटियों के साथ घाट व पिकनिक स्पॉट पर जाकर इसको खास बनाया।
नौ बेटियों को रविवार को देश सेवा प्रमाण पत्र दिया गया। विशाल भारत संस्थान एवं मुस्लिम महिला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में लमही स्थित सुभाष भवन में बेटी दिवस पर भारतीय रिश्तों के अधिवेशन की शुरुआत बेटी अधिवेशन से की गई। इसका शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने दिल्ली से किया।
उन्होंने कहा कि बेटियां भारतीय संस्कृति की राजदूत हैं। भारतीय संस्कृति एवं उसके मूल्यों को बचाए रखने में बेटियों की बड़ी भूमिका है। मुख्य अतिथि अपर पुलिस आयुक्त सुभाष चंद्र दूबे रहे। अधिवेशन में अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली नौ बेटियों को देश सेवा प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। इसमें मुख्य रूप से ऐनम खानम, दीक्षा श्रीवास्तव, डॉ. रोमेशा सोलंकी, वैशाली श्रीवास्तव, खुशी रमन, दक्षिता भारतवंशी, उजाला, इली, डॉ. अंजू श्रीवास्तव रहीं।
मेरी बेटियां, मेरा अभिमान
बिरदोपुर निवासी सर्वेश चोपड़ा के लिए उनकी बेटियां ही उनकी अभिमान हैं। डॉटर्स डे पर सर्वेश ने इस खास दिन को उनके साथ पिकनिक स्पॉट पर जाकर मनाया। मां ने मल्लिका व माउली दोनों बेटियों के पसंद का खाना भी तैयार किया था।
बेटी को हमेशा माना बेटा
गोदौलिया निवासी नमिता तिवारी ने अपने बेटी को एक बेटे जैसे ही पाल पोसकर बड़ा किया है। बेटी ने भी डाटर्स डे पर अपने दिल की बात कही। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि शुरू से मेरे माता-पिता ने एक बेटे की तरह ही परवरिश की है।