उन्होंने बताया कि पुणे के चार और औरंगाबाद के 34 श्मशान घाटों के अलावा दिल्ली, गुरुग्राम, अहमदनगर और गुवाहाटी जैसे शहरों में भी बायोमास ब्रिकेट्स का उपयोग कर शवों को जलाया जा रहा है। महाराष्ट्र, पंजाब, गोवा, असम और दिल्ली के कुछ श्मशान घाटों पर भी बायोमास ब्रिकेट्स का उपयोग किया जा रहा है।
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पर्यावरण संरक्षण में मिलेगी मदद
श्मशान घाटों पर बायोमास ब्रिकेट्स का उपयोग एक दूरदर्शी कदम है जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। यह न केवल अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सस्ता करेगा बल्कि पेड़ों की कटाई को कम करके और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करके पर्यावरण को संरक्षित करने में भी मदद करेगा।