मां अन्नपूर्णा मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशीवासियों को देवोत्थान एकादशी की बधाई दी। कहा कि भारत की विरासत का संरक्षण कैसे किया जाना चाहिए, प्रधानमंत्री इसके सबसे जीवंत उदाहरण हैं।
काशी विश्वनाथ धाम में माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर में काशी की जनता को संबोधित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का प्राचीन वैभव फिर से लौट रहा है।
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सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास से एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना मूर्त रूप ले रही है। इसी का प्रत्यक्ष उदाहरण है कि 108 साल पहले चोरी हुई मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा काशी वापस आकर फिर से प्राण प्रतिष्ठित हुई है।
सीएम ने दी देवोत्थान एकादशी की बधाई
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के सभागार में धर्माचार्य और काशी की जनता को संबोधित करते हुए सीएम ने काशी की जनता को देवोत्थान एकादशी की बधाई देते हुए हर-हर महादेव के साथ अपना संबोधन शुरू किया। सीएम ने कहा कि कहा कि अब तक हम देश से प्रतिमाएं चोरी होकर विदेशों में तस्करी किए जाने की बात सुनते थे।
भारत की विरासत के संरक्षण के जीवंत उदाहरण हैं पीएम
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग के महत्व को पीएम ने विश्व में फिर से स्थापित किया। आज पूरी दुनिया योग दिवस मना रही है। भारत में कुंभ का आयोजन होता है तो पूरे देश से संत जुट जाते हैं। यूपी में भव्य कुंभ का आयोजन हुआ। युनेस्को ने कुंभ को वैश्विक धरोहर की मान्यता भी दी। यह प्रधानमंत्री मोदी कीप्रेरणा से संभव हुआ। राम मंदिर के लिए पांच सौ वर्ष से संघर्ष चल रहा था। पीएम के प्रयास से पांच अगस्त 2020 को पांच सौ सालाें का संघर्ष समाप्त हुआ और आज भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है।
मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा एक बार फिर से काशी वापस आई है। इसका पूरा श्रेय काशी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री को जाता है। मैं काशीवासियों और प्रदेश सरकार की ओर से उन्हीं की काशी में आभार व्यक्त करता हूं। भारत की विरासत का संरक्षण कैसे होना चाहिए अगर यह जानना है तो प्रधानमंत्री इसके जीवंत उदाहरण है। उन्होंने अपने आचार-विचार से इसको साढ़े सात वर्षों के दौरान दिखाया है।
काशी और गंगा की पीएम ने की चिंता
सीएम ने कहा कि कौन ऐसा भारतीय होगा जो काशी पर गौरव की अनुभूति नहीं करता होगा। काशी की पहचान बाबा विश्वनाथ से है लेकिन उसकी स्थिति क्या थी। 1916 में महात्मा गांधी द्वारा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के लिए की गई टिप्पणी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी के नाम पर सत्ता प्राप्त करने वालों के ऊपर इसका कोई असर नहीं हुआ।
धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी ने कहां कि 108 वर्ष पूर्व काशी से चोरी गई मां अन्नपूर्णा की दुर्लभ मूर्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणा एवं प्रयास से काशी आकर पुन: काशी विश्वनाथ धाम में विराजमान हुई है। उन्होंने बताया कि माता अन्नपूर्णा की मूर्ति के शोभायात्रा के दौरान सड़कों पर श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ आया था। जिन-जिन मार्गों से प्रतिमा का शोभायात्रा गुजर रहा था, मौजूद जनसैलाब में लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद ज्ञापित कर रहे थे।
कोरोना काल से पहले ही भारत आ गई थीं मां की प्रतिमा
महामंडलेश्वर संतोष दास ने कहा कि मां अन्नपूर्णा को विश्वास था कि काशी का लाल उनको वापस लेकर आएगा और प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से काशी की मां अन्नपूर्णा बाबा के आंगन में विराज चुकी हैं। कोरोना काल के पहले ही मां अन्नपूर्णा की मूर्ति भारत आ गई थी। ज्ञान और वैराग्य की भिक्षा देने वाली मां अन्न-धन का भंडार भी भरती हैं और इसका उदाहरण है कि कोरोना काल में भारत के किसी भी घर का चूल्हा उन्होंने बुझने नहीं दिया।
वापस लौटें देश की और भी धरोहरें
अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने कहा कि अभी तक तो केवल यही सूचना मिलती थी कि भारत से मूर्ति चोरी होकर विदेश चली गई लेकिन अब विदेश से हमारी धरोहर वापस लौट रही हैं। यह हमारे लिए गौरव की बात है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि दूसरी जो धरोहरें हैं वह वापस लौटें इसमें जो भी सहयोग होगा हम जरूर करें
चार दिन पहले जब यूपी सरकार को प्राप्त हो हरी थी तो हमको लगा कि चार दिन में मूर्ति लेकर आ जाएंगे। दिन में यात्रा चलेगी और रात्रि विश्राम। मैं कल शाम आ गया था और धर्मार्थ कार्यमंत्री से बात की तो उन्होंने बताया कि अभी वह प्रतापगढ़ में हैं। प्रतापगढ़ से चलते-चलते आज सुबह छह बजे सर्किट हाउस पहुंचे। लोग श्रद्धा के साथ खड़े थे। जब दिल्ली से चली थी तो नीलकंठ तिवारी वहां थे। यात्रा सुबह से रात अनवरत चलती रही। श्रद्धालुओं का माता के प्रति अगाध श्रद्धा देखकर मन हर्षित हो गया। धर्मार्थ कार्य विभाग को इसके लिए साधुवाद