नए शूटर तैयार करना और गिरोह को आर्थिक मजबूती देना हनुमान का काम था। इस बीच हनुमान लगातार अपने घर आता-जाता रहा, लेकिन उसकी भनक पुलिस को नहीं लग पाई। सूत्रों के अनुसार, हनुमान ने पंजाब में मुख्तार से मुलाकात का भी प्रयास किया था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई थी।
वेश बदलने में माहिर था बदमाश हनुमान
हनुमान को उसकी जवानी के दिनों से जानने वाले मऊ के लोगों के अनुसार, वह वेश बदलने में माहिर था। इससे कई बार उसने पुलिस को चकमा दिया। कई बार चेकिंग के दौरान खुद को घिरता देखकर वह चरवाहा या तो ट्रैक्टर चालक बनकर आसानी से निकल जाता था। पुलिस यदि पकड़ भी लेती थी तो हनुमान अपनी पहचान जाहिर नहीं होने देता था। ऐसा वह मऊ और सुल्तानपुर में कई बार कर चुका था।
जेल के भीतर भी थी गजब की पैठ :
जेल के भीतर हनुमान की गजब की पैठ थी। जब 2012 में वह सुल्तानपुर की जेल में था और पेशी पर मऊ आया था तो तीन दिन निजी व्यवस्था में रहा था। अमर उजाला के मऊ जिले के संस्करण में यह खबर छपी थी तो तत्कालीन एसपी जोगेंद्र कुमार की रिपोर्ट के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। इसी तरह से हनुमान जब-जब जेल में रहा, तब-तब उसका सिक्का सलाखों के भीतर से खूब चला।