वाराणसी। का चचा वोट दे देला... के के देला हो, अब त बता दा... अब त सब बीत गइल...। सुसुवाही स्थित पंचायत भवन के बाहर जब संतोष ने 75 वर्षीय मंगरू राम से यह सवाल पूछा तो मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा कि भइया हो, जे जीती समझ लिहा ओही के ओटवा देली ह। यह कह कर मंगरू राम आगे बढ़ गए और बुदबुदाने लगे कि आज के लइका अपने के ढेर चतुर समझत हउअन।
मतदान केंद्र के बाहर सभी दलों के कार्यकर्ता टोह लेने में जुटे थे कि कौन, किसे वोट दे रहा है। जो खुले तौर पर जिस दल का समर्थक था वह तो खुशी-खुशी बता रहा था, लेकिन आम मतदाताओं ने पत्ते नहीं खोले। पूछने पर मुस्कुरा कर यही कर रहे थे कि जिसे भी जीत मिलेगी समझ लीजिएगा कि हमने उसी को वोट दिया है। कुछ ऐसा ही नजारा रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में बने नवनीता कुंवर पब्लिक स्कूल मतदान केंद्र पर भी दिखी। जहां कल्ली देवी से जब उनके नाती कल्लू ने पूछा कि दादी कौवने चिन्हवा क बटन दबइलू ह, जिसपर कल्ली ने तुरंत जवाब दिया कि ऐ लल्ला अंधेरवा में कुच्छो सही से देखात नाही रहल, जे के कर के रहल कर देहली, अब देखल जाई के जीतेला। ये किसी एक मतदान केंद्र का नजारा नहीं बल्कि कई जगहों पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला।