एनजीटी में दायर याचिका के अनुसार गंगा पार रेती पर 2021 में नहर का निर्माण कराया गया। 11.95 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नहर का काम जून में काम पूरा हुआ। बरसात आते ही अगस्त 2021 में नहर पूरी तरह से डूब गई और पानी उतरने के बाद नहर का अस्तित्व समाप्त हो चुका था।
अवधेश दीक्षित ने बताया कि नहर की ड्रेजिंग के समय जब इस पर सवाल उठाया गया तो बालू के उठान की निविदा जारी करके यह सिद्ध करने की कोशिश की गई कि नहर की ड्रेजिंग के एक हिस्से की लागत बालू उठान की निविदा से निकाला जा रहा है।