परेशान यात्रियों ने की विश्वनाथ मंदिर प्रशासन से शिकायत
करीब डेढ़ घंटे बाद यात्रियों का दल जब वापस उस स्थान पर पहुंचा, तो वहां उनके चप्पल तो मिले लेकिन गाइड नहीं मिला। यह सोचकर कि गाइड कुछ खाने-पीने इधर-उधर कहीं गया होगा, उन्होंने उसका दो घंटे इंतज़ार किया। इस बीच, उनमें से एक-दो यात्रियों ने स्थानीय लोगों से मोबाइल लेकर अवैध गाइड को दिए मोबाइलों पर फोन मिलाना शुरू किया, मगर हर एक बार, हर एक नंबर बन्द मिला। हर मानकर यात्रियों ने ज्ञानवापी कंट्रोल रूम जाकर इसकी शिकायत की।
सीसीटीवी फुटेज से पुलिस कर रही गाइड की तलाश
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मुआयना करने के साथ ही उस अवैध गाइड की काफी तलाश की लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज देखा तो उसमें काला कपड़ा पहने और ग्रे टोपी लगाए हाथ में गमछे की पोटली लेकर जाते अवैध गाइड दिखा तो यात्रियों ने उसे पहचान लिया।
पुलिस ने दशाश्वमेध और चौक थाने की पुलिस को उक्त सीसीटीवी फुटेज भेजकर उसकी तलाश शुरू कर दी है। साथ ही यात्रियों के नंबर को भी सर्विलांस पर डालकर लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास कर रही है।
सावन पूर्व मीटिंग में उठाया था मुद्दा, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
बता दें कि जब से विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का निर्माण हुआ है, तभी से दशाश्वमेध घाट से लेकर मैदागिन और रथयात्रा से लेकर सोनारपुरा तक अवैध गाइडों और दलालों की बाढ़ सी आ गई है। साथ ही डलिया-थरिया धारी छद्म भेषधारीयों की भी भरमार हो गई है।
यात्रियों से जबरन वसूली, मारपीट और ठगी करना इनकी नियति बन गई है। यह अवांछनीय तत्व कहाँ सकैए हैं, इनका कुंडली क्या है? यह कोई भी नहीं जानता। हाँ, उनकी अनाप-शनाप आपराधिक गतिविधियों और प्रलाप देखकर स्थानी लोगों ने विरोध करना चाहा तो ये उन्हें भी धमकाते हैं। लिहाज़ा, पब्लिक ने अनिष्ट के भय से बोलना ही बंद कर दिया।
सावन पूर्व दशाश्वमेध और मन्दिर प्रशासन के साथ संभ्रांत नागरिकों की बैठक हुई थी। उसमें क्षेत्रीय पार्षद समेत तीर्थ पुरोहितों, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने अवैध गाइडों और छद्मरूपियों की कारस्तानी उजागर करते हुए, उनपर नकेल कसने की बात कही थी।
पुलिस ने भरोसा दिलाते हुए यह कहा था कि अवैध गाइडों को इलाके से न केवल खदेड़ा जाएगा बल्कि उनकी जन्म कुंडली भी खंगालकर उन्हें सिखचों के पीछे किया जाएगा। जिससे यात्रियों के साथ लूट-खसोट न हो और साथ ही काशी की छवि भी धूमिल न होने पाए। लेकिन सावन आकर बीत भी गया मगर इन अवैध और अवांछनीय तत्वों पर कोई कार्रवाई न हो सकी।