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उम्मीद 2021: कोरोना की नकारात्मकता में उम्मीद के सहारे बने दूसरों का सहारा

Fri, 01 Jan 2021 12:32 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, वाराणसी
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नव वर्ष 2021 - फोटो : पिक्साबे
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बीता साल कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण बहुत उथल पुथल भरा रहा। किसी ने अपनों को अनायास ही खो दिया तो किसी का कामधंधा चौपट हो गया और वह घर बैठ गया। हालांकि जिंदगी तो संघर्ष करने और चलते रहने का नाम है। इस बात को जिले के कई लोगों ने अपने काम से साबित करते हुए यह दिखाया कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, कुछ सार्थक करते रह कर सकारात्मक संदेश देते रहना चाहिए। इसके साथ ही इन लोगों ने मुश्किल भरे दिनों में दूसरों को भी बेहतर करते रहने के लिए प्रेरित किया। 2021 में उम्मीद है कि सभी बेहतर और सकारात्मक काम कर एक-दूसरे के लिए उम्मीद का उजियारा बनेंगे।

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कुश्ती के कोच ने शुरू किया दूध-दही का व्यवसाय

कुश्ती के खेल प्रशिक्षक गोरख यादव। जो पिछले 12 साल से सिगरा स्टेडियम में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते थे। लॉकडाउन के बाद खेल निदेशालय ने अंशकालिक प्रशिक्षकों को बहाल नहीं किया। पांच महीने बेरोजगार बैठने के बाद गोरख ने अगस्त में भुल्लनपुर इलाके के वैशाली कालोनी में डेयरी खोल ली। जहां वो चितईपुर, कैंट, गोदौलिया जैसे मंडियों से दूध लाकर दही, पनीर का व्यवसाय कर रहे हैं।

महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर लोगों को सबसे अधिक जरूरी मास्क रहा। आपदा में अवसर को तलाशते हुए जानकी नगर निवासी इंजीनियरिंग के छात्र निखिल खन्ना ने महिलाओं को डिजाइनर मास्क बनाने का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया। काटन, सिल्क, वूलेन मास्क का उत्पादन करके महिलाओं ने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया और वर्तमान में मास्क के जरिए महिलाएं अच्छी आमदनी कर रही हैं।
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एक जिला एक उत्पाद - फोटो : अमर उजाला
ओडीओपी योजना से व्यापार को दी धार

लॉकडाउन के दौरान मंदे पड़े उद्योग, व्यवसाय को सरकार ने भी काफी सहारा दिया। शैलजा अरोड़ा ने ओडीओपी योजना के तहत ऋण लेकर अपने साड़ी प्रिंटिंग कारोबार को आगे बढ़ाया। उन्होंने लूप एजर मशीन खरीदी और उससे कारोबार को गति मिली। कई महिलाओं को अपने यहां रोजगार दिया। लॉकडाउन के दौरान कार्य करना मुश्किल था, लेकिन शैलजा ने हर चुनौतियों का सामना करते अपने कारोबार को एक नई उड़ान दी।

सेवा को बनाया अभियान, जरूरतमंदों तक पहुंचाया भोजन
लॉकडाउन के बाद जरूरतमंदों तक खाना पहुंचाने का अभियान प्रशासन ने शुरू किया। स्वयंसेवी संस्थाओं से समन्वय और भोजन वितरण के लिए विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राहुल पांडेय को सौंपी गई। उन्होंने दो महीने तक सुबह और शाम 50 हजार से ज्यादा लोगों तक भोजन पहुंचाने का काम किया। इस दौरान 24 घंटे फोन पर मौजूद रहे और किसी को भूखा नहीं सोने दिया। प्रशासन के इस अभियान को प्रधानमंत्री ने सराहा था।


 
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कोविड - फोटो : iStock

खुद हुए संक्रमित, लेकिन घर से जारी रखी मरीजों की सेवा
कोरोना पर नियंत्रण में लगे कई चिकित्सक भी संक्रमित हो गए। लेकिन उन्होंने अपना मनोबल बढ़ाए रखा और घर से ही मरीजों की सेवा में लगे रहे। डिप्टी सीएमओ डॉ. पीयूष राय उनमें से एक हैं। संक्रमित होने के बाद घर से ही होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों की सेहत की मॉनिटरिंग की। शुरुआती दौर में जमातियों से लेकर बाहर से आने वाले लोगों की कोरोना जांच में इन्होंने अहम भूमिका निभाई।

खुद को रखा परिवार से दूर, मरीजों से बढ़ाई नजदीकियां
मेडिकल आफिसर डॉ. अतुल कुमार सिंह पर कोविड अस्पतालों में मरीजों के जांच, इलाज की व्यवस्था की जिम्मेदारी थी। इस कार्यों के बीच वे बी संक्रमित हो गए। इसके बाद एहतियातन उन्होंने होम आइसोलेशन में भले ही परिवार के सदस्यों से अपने को अलग रखा, लेकिन घर से ही अपने फर्ज के प्रति तल्लीन रहे। कोविड मरीजों के इलाज संबंधी व्यवस्थाओं में लगे रहे। उन्होंने उम्मीद नही छोड़ी आज भी सजगतापूर्वक सेवा में लगे हैं।

अपने को संभालने के साथ-साथ की समाज की सेवा
लोहटिया के शिवशंकर विश्वकर्मा ने अपना व्यापार बदल लिया। साथ ही जरूरतमंदों का सहयोग भी किया। दरअसल, पहले लोहे की सीट का कारोबार करते थे। लेकिन कोरोना के चलते व्यापार बहुत अच्छा नहीं चला और जब लगातार घाटा होने लगा तो इन्होंने अपना व्यापार बदल दिया। अब लोहे के कील से बेहतर कारोबार कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने समाज के दबे कुचले लोगों की मदद की। प्रतिदिन 20 से 25 लोगों को भोजन कराया।

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