डीएम संग बैठक के बाद बार निकलते हिंदू पक्ष के लोग
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रविवार देर शाम एएसआई के एडिशनल डिप्टी डायरेक्टर प्रो. आलोक त्रिपाठी ने पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन और जिलाधिकारी एस राजलिंगम से मुलाकात करके सर्वे से जुड़े दोनों पक्षकारों की बैठक बुलाने का अनुरोध किया। एएसआई के कहने पर पुलिस आयुक्त और डीएम ने रविवार की देर रात अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी और हिंदू पक्ष के साथ अलग-अलग बैठक की। बैठक में अदालत के आदेश का हवाला देकर शांतिपूर्ण तरीके से सर्वे का काम संपन्न कराने में सहयोग की अपील की गई। डीएम एस. राजलिंगम ने बताया कि एएसआई की टीम शहर में आ गई है। अदालत के आदेशानुसार, सोमवार सुबह से ज्ञानवापी परिसर में सर्वे का काम शुरू होगा।
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सर्वे के दौरान ज्ञानवापी परिसर में एएसआई की 30 सदस्यीय टीम के अलावा हिंदू पक्ष की चार वादिनी महिला व उनके चार अधिवक्ता मौजूद रहेंगे। मसाजिद कमेटी से भी चार लोगों और उनके चार अधिवक्ताओं को रहने के लिए कहा गया है। इसके अलावा जिला शासकीय अधिवक्ता, राज्य सरकार के अधिवक्ता, केंद्र सरकार के अधिवक्ता, एडीएम सिटी और एक अपर पुलिस आयुक्त मौजूद रहेंगे। फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर कौन रहेंगे, इस संबंध में एएसआई को निर्णय लेना है।
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सर्वे से संबंधित जिला जज की अदालत के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किया है। चार महिला वादिनी सीता साहू, रेखा पाठक, मंजू व्यास और लक्ष्मी देवी के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की जा चुकी है। इसी तरह मां श्रृंगार गौरी मुकदमे की एक अन्य वादिनी राखी सिंह की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की गई है। उनके अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि राखी सिंह एएसआई से सर्वे के समर्थन में हैं। कैविएट इसलिए दाखिल की गई है कि किसी भी आदेश से पहले उनके पक्ष को सुना जाए।
मुस्लिम पक्ष की तरफ से अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है। इस पर जल्द ही सुनवाई संभव है। कमेटी की तरफ से कहा गया कि ज्ञानवापी के सर्वे का आदेश नहीं दिया जा सकता है। जिला जज की अदालत का आदेश सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है।