संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए प्रदेश सरकार ने 54 लाख 59 हजार रुपये की धनराशि जारी की है। शासन द्वारा नई अंशदायी पेंशन योजना के अंतर्गत यह अनुदान राशि विश्वविद्यालय को मिली है। धनराशि का उपयोग संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा सिर्फ सरकारी अंशदान के रूप में ही किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के सत्र 2021-22 के लिए राज्य विश्वविद्यालय को शासन की ओर से एनपीसी अंशदान के लिए धनराशि की स्वीकृति मिली है। शासन द्वारा साफ दिशा-निर्देश है कि स्वीकृत की जा रही धनराशि का उपयोग शासकीय व्यय में वित्त विभाग द्वारा समय-समय पर निर्गत आदेशों और वित्तीय नियमों के आधार पर किया जाएगा। साथ ही अगर वित्तीय वर्ष की समाप्ति के वक्त तक स्वीकृत की गई धनराशि का कोई भी अंश शेष बचता है तो वित्तीय वर्ष के अंतिम माह मार्च में उसे शासन को वापस भेजना होगा। इस अनुदान का उपयोग अनुमोदित मदों पर ही किया जाएगा। इन पैसों का इस्तेमाल विश्वविद्यालय द्वारा अवकाश नकदीकरण, चिकित्सा भत्ता, सवारी भत्ता, मानदेय या अन्य किसी कार्य के लिए नहीं किया जा सकता है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि शासन की ओर से तीन विश्वविद्यालय के लिए 3 करोड़ 48 लाख 34 हजार रुपये की धनराशि दी गई है। इसमें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को 54 लाख 59 हजार रुपये की स्वीकृति मिली है।