इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने कुछ नहीं किया। सीसीटीवी फुटेज की मांग की गई तो वह नहीं उपलब्ध कराया गया। आठ सितंबर को बेटी जब स्कूल से घर आई तो पत्नी ने देखा कि बस में कंडक्टर ज्ञानेंद्र ने बच्ची को गलत तरीके से दबा रखा था। अगले ही दिन नौ सितंबर को स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज विनय से मुलाकात की और बस की सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की, ताकि यह पता चल सके कि कंडक्टर ज्ञानेंद्र बच्ची के साथ क्या हरकत करता है।
इंचार्ज ने कहा कि फुटेज स्वत: करप्ट हो गया। पिता के अनुसार बच्ची की मानसिक स्थिति को देखते हुए स्कूल न भेजने का निर्णय लिया। अगले दिन बच्ची ने खुद बताया कि बस में कंडक्टर उसे परेशान करता है और गलत हरकत करता है। इसकी रिर्काडिंग भी स्कूल प्रबंधन को भेजी। वहीं, दूसरे दिन ही स्कूल के आपरेशन हेड से मुलाकात की और उन्होंने आश्वस्त किया कि हर हाल में फुटेज को रिकवर किया जाएगा।
पिता का आरोप है कि बस के अंदर सीसीटीवी फुटेज से भी छेड़छाड़ किया गया। स्कूल प्रबंधन ने घटना पर पर्दा डालने की कोशिश की है। पिता के अनुसार 14 सितंबर को आपरेशन हेड ने सीसीटीवी फुटेज दिखाया। फुटेज में पाया कि रूट नंबर 115 की बस में आठ सितंबर दोपहर 12.08 से लेकर 12.10 के बीच की फुटेज गायब थी। आगे 12.26 से 12.34 और 12.39 की फुटेज गायब मिला।
इस मामले में शिकायत किए जाने के बाद भी स्कूल प्रबंधन ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद मंगलवार की शाम पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सूर्यकांत त्रिपाठी से गुहार लगाने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया। इंस्पेक्टर अश्वनी चतुर्वेदी के अनुसार मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। स्कूल प्रबंधन से भी पूछताछ की जाएगी।
वहीं इस बारे में स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज विनय ने कहा कि सड़क में कई जगह गड्ढे हैं और ट्रैफिक के दौरान बस में ब्रेक लगाया जाता है। ऐसे में छोटे बच्चे गिर जाते हैं। कंडक्टर द्वारा बच्ची की सुरक्षा के लिए उसे पकड़ा गया था, अभिभावक द्वारा लगाया गया आरोप निराधार है।