एक आचार्य दूसरे आचार्य की व्यवस्था में अतिक्रमण नहीं कर सकते हैं। अगर कभी धर्म का संकट उत्पन्न होता है, तो वह आपस में बातचीत करके इसका समाधान प्रस्तुत करेंगे। मुख्य अतिथि प्रो. जयशंकर लाल त्रिपाठी ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने यह व्यवस्था तय कर दी थी कि एक आचार्य एक से अधिक पीठों का आचार्य नहीं होगा।
यदि किसी शंकराचार्य की पीठ खाली है तो अल्पकाल के लिए कोई शंकराचार्य इसकी व्यवस्था देख सकते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने कहा कि सनातन धर्म में व्याप्त विकृतियों को खत्म करने के लिए समय-समय पर ऐसी विलुप्त प्राय पुस्तकों पर चर्चा होना जरूरी है।