निर्वाचन आयोग की सख्ती के चलते उम्मीदवारों ने चुनाव प्रचार का नया तरीका अपना लिया है। उम्मीदवार वाट्सऐप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया का खुल कर इस्तेमाल कर रहे हैं। मोबाइल पर वाइस रिकार्डिंग व मैसेज भेजकर प्रचार किया जा रहा है।
चुनावी जंग एक तरह से मैसेज वार बन गई है। प्रत्याशी हर हाथ में मोबाइल होने का फायदा उठा रहे हैं।
चुनाव आयोग की सख्ती और नोटबंदी का असर इस बार चुनाव प्रचार पर दिख रहा है।
बैनर, पोस्टर, पंपलेट और पर्ची आदि का इस्तेमाल प्रचार में अभी कम ही हो रहा है। नेताओं के झंडे तक लोगों के घरों पर नहीं लहरा रहे हैं। प्रचार का ज्यादातर काम सोशल मीडिया पर हो रहा है। आनलाइन प्रचार के लिए भी अनुमति की जरूरत होती है लेकिन ज्यादातर नेता और उनके समर्थक बगैर किसी अनुमति के ही मैसेज भेज रहे हैं।
दिलचस्प बात यह कि आचार संहिता के पालन का खूब हो हल्ला मच रहा है लेकिन अभी सोशल मीडिया पर जारी प्रचार पर नियंत्रण नहीं हो पाया है।
मिर्जापुर जिला मजिस्ट्रेट कंचन वर्मा ने चुनाव में हो रहे प्रचार की निगरानी के लिए 10 सहायक प्रेक्षक, 15 वीडियो निगरानी टीम, 15 वीडियो अवलोकन टीम, 10 लेखा टीम, 20 मीडिया प्रमाणन टीम बनाया है।
टीम नेताओं के प्रचार की लगातार निगरानी कर रही है। इसकी सूचना कलेक्ट्रेट परिसर के कंट्रोल रूम को लगातार दी जा रही है। इन टीमों द्वारा कई स्थानों पर तमाम प्रत्याशियों के बैनर, पोस्टर और फ्लैक्स आदि जब्त किए हैं।
उनका खर्चा आयोग के निर्देश पर संबंधित प्रत्याशी के खर्चे में जोड़ा जा रहा है। आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में कई प्रत्याशियों पर मुकदमा पंजीकृत कराया जा चुका है। मगर सोशल मीडिया पर प्रचार करने वाले किसी नेता पर अभी कार्रवाई नहीं हुई।