Durga Puja 2024: इस बार शारदीय नवरात्रि में 890 साल बाद प्रतिकीर्ति योग में मां की आराधना होगी। हस्त नक्षत्र में कल घरों से मंदिरों तक कलश स्थापना होगी।
अश्विन शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी तीन अक्तूबर को शारदीय नवरात्र शुरू हो रही है। घट स्थापन के लिए सुबह से शाम तक मुहूर्त है। इस बार 890 साल बाद प्रतिकीर्ति एवं ऐंद्र योग पड़ रहा है। जबकि हस्त नक्षत्र रहे। भक्त घरों से लेकर मंदिरों तक कलश बैठाकर नौ दिनों तक पूजन-अचर्न करेंगे। इसके चलते पूजन सामग्री और पूजा पंडालों की तैयारी तेज हो गई है। वहीं, मूर्तिकार दुर्गा प्रतिमाओं को भी अंतिम रूप देने में लगे हैं। इस बार नवरात्र तीन अक्तूबर से 11 अक्तूबर तक मां दुर्गा की आराधना होगी।
विज्ञापन
नवरात्र में मुहूर्त व राशि के अनुसार पूजा करने से माता रानी की भक्तों पर कृपा बरसेगी। जिन्हें राशि नहीं पता वो मां की पूजा गुड़हल से करें और मां को खीर-पूड़ी व हलवा का भोग लगाएं। कुछ पूजा पंडालों में मां विराजेंगी। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार प्रतिपदा पर प्रतिकीर्ति योग 890 साल लगा है, जो पूजन की दृष्टि से काफी फलदायी है।
ये है घट स्थापन के शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं
- फोटो : Amar Ujala Graphics
ज्योतिषविदों के अनुसार घट स्थापना का मुहूर्त सुबह 06:07 बजे से सुबह 9:30 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:37 बजे से 12:23 बजे, अमृत चौघड़िया दोपहर 01:38 बजे से 03:07 बजे, विजय मुहूर्त: दोपहर 02:26 से 03:14 बजे, गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:25 बजे से शाम 06:49 बजे तक तथा संध्याकाल में 06:25 बजे से 07:37 तक है।
डोली पर सवार होकर आएंगी माता
नवरात्र अगर सोमवार या रविवार से शुरू हो तो मातारानी का आगमन हाथी पर, मंगलवार या शनिवार से हो तो मां का आगमन घोड़े पर, बुधवार को नाव पर और शुक्रवार या गुरुवार के दिन माता का आगमन होता है तो वह डोली या पालकी सवार होकर आती हैं।
पहले दिन शैलपुत्री और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री का होगा दर्शन
Shardiya Navratri 2024
- फोटो : freepik
शारदीय नवरात्र के पहले दिन तीन अक्तूबर को मां शैलपुत्री का दर्शन पूजन होगा। इसके बाद चार को मां ब्रह्मचारिणी, पांच को मां चंद्रघंटा, छह को मां कुष्मांडा, सात को मां स्कंदमाता, आठ को मां कात्यायनी, नौ को मां कालरात्रि, 10 को मां महागौरी, 11 को मां सिद्धिदात्री का दर्शन पूजन होगा। 12 अक्तूबर को दशहरा मनाया जाएगा।
मेषः स्कंदमाता की पूजा करें। लाल फूल से पूजन व दूध से बने पेड़े का भोग लगाएं। मंत्र-ओम ह्रीं उमा देव्यै नमः। वृषभः मां महागौरी की पूजा करें। सफेद मिठाई और सफेद फूल चढ़ाएं। ओम क्रां क्री क्रू कालिका देव्यै नमः। मिधुनः मां कूष्मांडा की पूजा करें। लाल फूल, चीनी और पंचामृत अर्पित करें। ओम दूं दुर्गार्य नमः। कर्क: देवी शैलपुत्री की पूजा करें। बताशा और चावल का भोग लगाएं। ओम ललिता देव्यै नमः। सिंहः मां कृष्मांडा की पूजा करें। रोली और कैसर चढ़ाएं। दुर्गा शप्तसती का पाठ करें। कन्याः मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करें। खीर का भोग लगाएं। ओम शूल धारिणी देव्यै नमः। तुलाः महागौरी की पूजा करें। मां को लाल चुनरी और फूल चढ़ाएं। ओम ह्रीं महालक्ष्म्यै नमः। वृश्चिकः मां कालरात्रि की पूजा करें। सुबह और शाम मां दुर्गा की आरती करें। ओम शक्तिरूपायै नमः। धनुः मां स्कंदमाता की पूजा करें। पीले फूल और मिठाई का भोग लगाएं। ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। मकरः मां कात्यायनी की पूजा करें। नारियल व चुनरी चढ़ाएं। ओम पां पार्वती देव्ये नमः। कुंभः मां कालरात्रि की पूजा करें। हलवे का भोग लगाएं। ओम पां पार्वती देव्ये नमः। मीन: मां चंद्रघंटा की पूजा करें। पीला केला व पीला फूल चढ़ाएं। ओम श्री हृीं श्री दुर्गा देव्ये नमः।