इसमें मालिक से जमीन लेकर विकास प्राधिकरण उसमें सड़क, बिजली, पानी सहित अन्य सुविधाएं विकसित करेगा। चिह्नित जमीन पर नई काशी बसाने के लिए जोनल प्लान बनाया जाएगा। इसमें इंडस्ट्रियल, कामर्शियल, रेजीडेंसियल इलाके चिह्नित किए जाएंगे और इसी हिसाब से विकास कराया जाएगा। सभी सुविधाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की योजना है।
ऐसे में किसानों की जमीन लेने की बजाय उनकी सहमति से जमीनों को सरकार सुविधाएं विकसित करने के लिए लेगी। इसमें जमीन का मालिकाना हक किसान का ही रहेगा। सुविधाएं विकसित होने के कारण इन जमीनों की अच्छी कीमत भी मिलेगी। इसके अलावा नगरीय सुविधाओं के लिए वीडीए प्राइवेट कंपनियों की भी मदद लेगा।
टाउन प्लानिंग स्कीम को आकार देने के लिए बुधवार को वीडीए की टीम ने रेवसा के किसानों के साथ बात की। इस बैठक में बड़े किसानों ने जमीन देने पर सहमति दी है लेकिन जो छोटे कास्तकार है वह अभी संशय में हैं। करीब ढाई घंटे चली बैठक 70 किसानों की मौजूदगी में बड़े कास्तकार योजना को लेकर अपनी जमीन देने को तैयार हो गए। वहीं छोटे किसानों का कहना था कि अगर पूरी जमीन योजना से प्रभावित हो गई तो हम अपना गुजर-बसर कैसे करेंगे।
किसानों का कहना था कि 50 प्रतिशत जमीन योजना की बुनियादी सुविधाओं व लैंड पूलिंग में चली चली जाएगी ऐसे में हम केवल 50 प्रतिशत ही जमीन का लाभ पा सकेंगे। हालांकि उन्हें एसडीएम विनोद कुमार सिंह व वीडीए की टीम के अन्य सदस्यों ने बताया कि चकबंदी में भी ऐसा ही होता है। रोड व चकआउट में जैसे जमीन जाती है उसी तरह इसमें भी जाएगी लेकिन जमीन की कीमत चार गुने से भी अधिक हो जाएगी। गुरुवार को ट्रांसपोर्ट नगर के किसानों के साथ जीटी रोड से सटे बैरवन पंचायत भवन में बात होगी।