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लैंड पूलिंग स्कीम से पूरा होगा नई काशी का सपना, जमीन अधिग्रहण में करीब 800 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना

Thu, 12 Aug 2021 10:12 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

सभी सुविधाओं से लैस और सुव्यवस्थित शहर की परिकल्पना को साकार करने वाली न्यू काशी के लिए रिंग रोड किनारे ऐढे़ में 309 हेक्टेयर जमीन वीडीए ने चिह्नित कर शासन को भेजी है। यदि जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा तो करीब 800 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है।
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वाराणसी विकास प्राधिकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व फलक पर चमक रही काशी में आबादी के दबाव को कम करने के लिए बसाई जाने वाली न्यू काशी के लिए अब लैंड पूलिंग स्कीम ही सहारा है। जमीन अधिग्रहण की लंबी प्रक्रिया और अड़चनों के चलते अब नई काशी को विकसित करने के  लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) की योजना पर काम किया जाएगा। हालांकि कई गांवों के ज्यादातर किसानों से जमीन देने पर सहमति दी है। मगर, 300 एकड़ के लिए 11 गांवों के किसानों से जमीन लेना विकास प्राधिकरण के सामने बड़ी चुनौती है।

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सभी सुविधाओं से लैस और सुव्यवस्थित शहर की परिकल्पना को साकार करने वाली न्यू काशी के लिए रिंग रोड किनारे ऐढे़ में 309 हेक्टेयर जमीन वीडीए ने चिह्नित कर शासन को भेजी है। यदि जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा तो करीब 800 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। ऐसे में शासन की ओर से जमीन अधिग्रहण की योजना पर ब्रेक लगेगा।

जोनल प्लान के हिसाब से ही लैंड पूलिंग के जरिए जमीन विकसित की जाएगी। इसके लिए वीडीए ने मंगलवार को छह गांवों के किसानों के साथ बैठक कर अपनी योजना की जानकारी दी है। ऐसे में अब इस योजना को परवान चढ़ाने के लिए कवायद तेज की जाएगी।
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मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि लैंड पूलिंग स्कीम के जरिए ही किसानों से जमीन लेकर सुविधाएं विकसित की जाएंगी। नई काशी के लिए जोनल प्लान तैयार कराया जा रहा है। इसी आधार पर लैंड पूल कर सुविधाएं विकसित होंगी। 

जोनल प्लान से बसाई जाएगी नई काशी

इसमें मालिक से जमीन लेकर विकास प्राधिकरण उसमें सड़क, बिजली, पानी सहित अन्य सुविधाएं विकसित करेगा। चिह्नित जमीन पर नई काशी बसाने के लिए जोनल प्लान बनाया जाएगा। इसमें इंडस्ट्रियल, कामर्शियल, रेजीडेंसियल इलाके चिह्नित किए जाएंगे और इसी हिसाब से विकास कराया जाएगा। सभी सुविधाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की योजना है।

ऐसे में किसानों की जमीन लेने की बजाय उनकी सहमति से जमीनों को सरकार सुविधाएं विकसित करने के लिए लेगी। इसमें जमीन का मालिकाना हक किसान का ही रहेगा। सुविधाएं विकसित होने के कारण इन जमीनों की अच्छी कीमत भी मिलेगी। इसके अलावा नगरीय सुविधाओं के लिए वीडीए प्राइवेट कंपनियों की भी मदद लेगा।
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बड़े किसान राजी, छोटे संशय में

टाउन प्लानिंग स्कीम को आकार देने के लिए बुधवार को वीडीए की टीम ने रेवसा के किसानों के साथ बात की। इस बैठक में बड़े किसानों ने जमीन देने पर सहमति दी है लेकिन जो छोटे कास्तकार है वह अभी संशय में हैं। करीब ढाई घंटे चली बैठक 70 किसानों की मौजूदगी में बड़े कास्तकार योजना को लेकर अपनी जमीन देने को तैयार हो गए। वहीं छोटे किसानों का कहना था कि अगर पूरी जमीन योजना से प्रभावित हो गई तो हम अपना गुजर-बसर कैसे करेंगे।

किसानों का कहना था कि 50 प्रतिशत जमीन योजना की बुनियादी सुविधाओं व लैंड पूलिंग में चली चली जाएगी ऐसे में हम केवल 50 प्रतिशत ही जमीन का लाभ पा सकेंगे। हालांकि उन्हें एसडीएम विनोद कुमार सिंह व वीडीए की टीम के अन्य सदस्यों ने बताया कि चकबंदी में भी ऐसा ही होता है। रोड व चकआउट में जैसे जमीन जाती है उसी तरह इसमें भी जाएगी लेकिन जमीन की कीमत चार गुने से भी अधिक हो जाएगी। गुरुवार को ट्रांसपोर्ट नगर के किसानों के साथ जीटी रोड से सटे बैरवन पंचायत भवन में बात होगी।
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