प्रतिबंध का खास असर नहीं, शोर में आई कमी
लंका इलाके में शाम छह बजे के बाद आसमान में सतरंगी छटा बिखेरने वाले पटाखे दिखाई देने लगे। गलियों और कालोनियों में चोरीछिपे दुकानों पर पटाखे की बिक्त्रस्ी होती रही। बीएचयू कैंपस से लगायत आसपास के क्षेत्र भगवानपुर, सीरगोवर्धनपुर, छित्तूपुर, सामने घाट से लेकर डाफी बाईपास के इर्दगिर्द के गांवों में आतिशबाजी हुई। इसके साथ ही अस्सी, शिवाला और भदैनी, रवींद्रपुरी, गुरुधाम और दुर्गाकुंड आदि कई क्षेत्रों में भी युवा पटाखे जलाते दिखे। इस दौरान कई युवा पटाखे जलाते हुए मोबाइल में वीडियो और ग्रुप फोटो भी खींचे।
पुराने पटाखे काम आए, खरीदने के लिए भटकते रहे
प्रशासन की रोक और बाजार में आसानी से पटाखे न मिलने से लोग पुराने पटाखों से ही काम चलाते दिखे। औरंगाबाद, सोनिया, सिद्धगिरीबाग, लक्सा, नई सड़क, कालीमहाल आदि इलाकों में रह-रह कर पटाखों की आवाज सुनाई देती रही। इन इलाकों में झालर, दीया और मोमबत्ती की सजावट के बीच अचानक तेज धमाका बता रहा था कि पटाखों पर प्रतिबंध का कोई खास असर नहीं है। वहीं शाम के समय कई लोग अपने घर के बच्चों को लेकर पटाखे खोजते भी दिखे।
चोरीछिपे दोगुनी कीमत पर खूब बिके पटाखे
जिले भर में दर्जनों जगह शनिवार की दोपहर बाद चोरीछिपे जमकर पटाखे बिके। इस दौरान दुकानदारों ने पटाखों की दोगुनी कीमत वसूली। पटाखे बेचे भी उसे ही जा रहे थे जो किसी न किसी तरह से परिचित हो। कुछेक जगह तो पुलिस भी पटाखे बिकने की दुकान के आसपास ही मौजूद थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस वालों का कहना था कि त्योहार के दिन दो पैसे कमाने की आस में बैठे व्यक्ति को क्यों नाहक में परेशान किया जाए।