उत्तर प्रदेश की पहली मॉडल सिटी बसाने की योजना भी कागजों से बाहर नहीं आ पाई। रिंग रोड किनारे नई काशी की बसाने के लिए गुजरात की एक कंपनी को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें 13 गांवों में 850 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने का प्रस्ताव भी दिया गया था। मगर इस बीच शूलटंकेश्वर के पास इस योजना को शिफ्ट करने की योजना बनने लगी। करीब तीन साल बाद भी न्यू काशी पर स्थिति जस की तस है। जबकि इस योजना पर भी करीब तीन करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो गया है।
पुरानी काशी को संवारने के लिए विकास प्राधिकरण ने सूरत की डिजाइन प्वाइंट कंसलटेंट को सर्वे का जिम्मा दिया था। सर्वे में एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने के बाद अब तक इस योजना पर कोई निर्णय नहीं किया गया। इस योजना में लक्सा इलाके में पुराने व जर्जर मकान को हटाकर नया निर्माण कराए जाने का प्रस्ताव है। यहां बिना किसी को विस्थापित किए बुनियादी सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।
वाराणसी नगर निगम की 9वीं कार्यकारिणी की स्थगित बैठक 15 जून को होगी। इसमें नगर के सभी 90 वार्ड और नगर निगम की सीमा में शामिल 86 गांव के विकास का खाका तैयार होगा। इसमें शहर की प्रमुख समस्याओं के निदान के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इनमें सीवर, जल निकासी, सड़क, स्ट्रीट लाइटें, साफ-सफाई, पेयजल आदि प्रमुख केंद्र बिंदु होंगे।
पूर्व में हुई बैठक में जहां नगर आयुक्त के खिलाफ महापौर और पार्षदों ने मोर्चा खोला था। उससे प्रतीत हो रहा है कि बैठक हंगामा होना तय है। नगर निगम की कार्यकारिणी में कुल 12 सदस्य हैं। इनकी नब्ज टटोली गई तो सभी ने कहा की पूर्व के जो भी प्रस्ताव दिए गए हैं।
उन सभी की पुष्टि कार्यकारिणी की बैठक में की जाएगी। पार्षदों के अनुसार, कार्यकारिणी से पास हुए प्रस्तावों को नगर निगम प्रशासन की ओर से लागू नहीं किया जा रहा है। जो लागू भी हो रहे हैं वह बहुत ही सीमित दायरे में हो रहे हैं। जिससे शहर का विकास प्रभावित हो रहा है।