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वाराणसी: कागजों में घूम रही विकास योजनाएं, करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद नई काशी से लेकर टीपी नगर में वीडीए खाली हाथ

Mon, 14 Jun 2021 09:52 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

उत्तर प्रदेश की पहली मॉडल सिटी बसाने की योजना भी कागजों से बाहर नहीं आ पाई। रिंग रोड किनारे नई काशी की बसाने के लिए गुजरात की एक कंपनी को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई थी। मगर करीब तीन साल बाद भी न्यू काशी पर स्थिति जस की तस है
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वाराणसी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी शहर के विकास के लिए बनी कई परियोजनाएं अब भी कागजों से बाहर नहीं निकल पाई हैं। कई परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च भी कर दिए गए, मगर विकास प्राधिकरण खाली हाथ है। आलम यह है कि विकास प्राधिकरण अपनी अटकी परियोजनाओें के लिए कोई प्रयास भी नहीं कर रहा है।

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तीन साल पहले नई काशी की परिकल्पना की गई और अब तक उसका स्थान तक चयन नहीं किया जा सका। ऐसे ही वर्षों से अटके ट्रांसपोर्ट की जमीन के विवाद को भी सुलझाया नहीं जा सका है। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि जिन परियोजनाओं और योजनाओं पर काम आगे नहीं बढ़ा है उसकी समीक्षा कराई जाएगी। तकनीकी दिक्कतों को दूर कर परियोजनाओं को शुरू कराया जाएगा।



18 साल बाद भी टीपी नगर पर निर्णय नहीं
विकास प्राधिकरण ने मोहन सराय के पास बैरवन, सरायमोहन, कंकनाडाडी और मिल्कीचक में 45 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की। मगर विरोध के चलते अब तक उस पर कब्जा नहीं मिल पाया। उस समय 82 करोड़ रुपये में 89 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी थी। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए बनी यह योजना करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद अधर में लटकी है।
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करीब तीन साल पहले तत्कालीन उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने शासन को पत्र लिखकर किसानों की जमीन वापस करने, उनसे मुआवजा वापस लेने और इस योजना को दूसरी जगह करने का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद वीडीए वीसी राहुल पांडेय ने भी कुछ प्रयास किए, मगर सफलता नहीं मिली।

नई काशी के लिए स्थान का चयन ही नहीं

उत्तर प्रदेश की पहली मॉडल सिटी बसाने की योजना भी कागजों से बाहर नहीं आ पाई। रिंग रोड किनारे नई काशी की बसाने के लिए गुजरात की एक कंपनी को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें 13 गांवों में 850 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने का प्रस्ताव भी दिया गया था। मगर इस बीच शूलटंकेश्वर के पास इस योजना को शिफ्ट करने की योजना बनने लगी। करीब तीन साल बाद भी न्यू काशी पर स्थिति जस की तस है। जबकि इस योजना पर भी करीब तीन करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो गया है।

एलएपी पर भी आगे नहीं बढ़ी बात

पुरानी काशी को संवारने के लिए विकास प्राधिकरण ने सूरत की डिजाइन प्वाइंट कंसलटेंट को सर्वे का जिम्मा दिया था। सर्वे में एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने के बाद अब तक इस योजना पर कोई निर्णय नहीं किया गया। इस योजना में लक्सा इलाके में पुराने व जर्जर मकान को हटाकर नया निर्माण कराए जाने का प्रस्ताव है। यहां बिना किसी को विस्थापित किए बुनियादी सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।
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वाराणसी नगर निगम की बैठक कल, शहर के विकास का तैयार होगा खाका

वाराणसी नगर निगम - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी नगर निगम की 9वीं कार्यकारिणी की स्थगित बैठक 15 जून को होगी। इसमें नगर के सभी 90 वार्ड और नगर निगम की सीमा में शामिल 86 गांव के विकास का खाका तैयार होगा। इसमें शहर की प्रमुख समस्याओं के निदान के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इनमें सीवर, जल निकासी, सड़क, स्ट्रीट लाइटें, साफ-सफाई, पेयजल आदि प्रमुख केंद्र बिंदु होंगे।

पूर्व में हुई बैठक में जहां नगर आयुक्त के खिलाफ महापौर और पार्षदों ने मोर्चा खोला था। उससे प्रतीत हो रहा है कि बैठक हंगामा होना तय है। नगर निगम की कार्यकारिणी में कुल 12 सदस्य हैं। इनकी नब्ज टटोली गई तो सभी ने कहा की पूर्व के जो भी प्रस्ताव दिए गए हैं।

उन सभी की पुष्टि कार्यकारिणी की बैठक में की जाएगी। पार्षदों के अनुसार, कार्यकारिणी से पास हुए प्रस्तावों को नगर निगम प्रशासन की ओर से लागू नहीं किया जा रहा है। जो लागू भी हो रहे हैं वह बहुत ही सीमित दायरे में हो रहे हैं।  जिससे शहर का विकास प्रभावित हो रहा है। 
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