इसके अलावा अयोध्या में भी भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। इन भव्य मंदिरों का निर्माण पूरा होने के बाद व्यवस्था संचालन के लिए धर्मार्थ कार्य मंत्रालय को किसी पर आश्रित रहना पड़ता। मगर, निदेशालय के गठन के बाद इन भव्य मंदिरों में श्रद्धालुु सुविधाओं से लेकर हर तरह की व्यवस्था में धर्मार्थ कार्य मंत्रालय करेगा।
35 साल बाद किया जा रहा है निदेशालय का गठन
धर्मार्थ संस्थाओं व मंदिरों के व्यवस्थापन से संबंधित कार्यों के निष्पादन के लिए 19 दिसंबर 1985 को अलग से धर्मार्थ कार्य विभाग का सृजन किया गया था। इसका सिर्फ एक अनुभाग प्रमुख सचिव के नेतृत्व में शासन स्तर पर क्रियाशील है। लगभग साढ़े तीन दशक बाद भी इसका निदेशालय नहीं स्थापित था। इसके कारण धर्मार्थ कार्य विभाग की योजना, परियोजनाओं के संचालन में प्रशासनिक समस्याएं आती थीं। 35 साल के बाद निदेशालय का गठन किया जा रहा है। इसके गठन से भविष्य में धर्मार्थ कार्य विभाग और अच्छे से अपना काम कर सकेगा।
सार्वजनिक धार्मिक संपत्तियों का डेटाबेस सुरक्षित
धर्मार्थ कार्य निदेशालय की काशी विश्वनाथ धाम में स्थापना की घोषणा से संत समाज में प्रसन्नता की लहर है। अखिल भारतीय संत समिति ने सीएम योगी आदित्यनाथ और धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी को साधुवाद दिया है।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि निदेशालय बन जाने के बाद उतर प्रदेश के मठ-मंदिरों का सही हिसाब किताब, इनकी संख्या, कहां हैं, किस हाल में हैं, इसमें महंत कौन है। इनकी सारी जानकारियां एक डेटाबेस के रूप में सुरक्षित होंगी।
स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह हुई है कि सनातन हिन्दू धर्म की वैश्विक राजधानी बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी में यह निदेशालय बनेगा। अल्पसंख्यकों से जुड़े हुए विषय उनकी मस्जिद, उनके खर्चों का हिसाब-किताब उनके धर्म के हिसाब से चलता था। सुन्नी वक्फ बोर्ड, शिया वक्फ बोर्ड द्वारा ही सब नियंत्रित होता था। चर्च मिशनरियों की कमेटियां नियंत्रित करती हैं। हिन्दुओं के धर्मार्थ कार्य के लिए मंत्रालय सिर्फ एक लॉलीपॉप था।
निदेशालय किसी भी विभाग के संचालन की इकाई होती है। धर्मार्थ कार्य का निदेशालय नहीं होने से काम में बाधा आती थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय धर्मार्थ कार्य मंत्रालय के मार्ग को प्रशस्त करेगा। - डॉ. नीलकंठ तिवारी, धर्मार्थ कार्य मंत्री