अंर्तविर्षयक शोध अध्ययन केंद्र का उद्देश्य
मैथिली अध्ययन केंद्र की स्थापना का उद्देश्य मिथिला की विपुल विरासत का अध्ययन करना है। देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूती प्रदान करने में भी मैथिली संस्कृति की अहम भूमिका रही है। केंद्र के तहत इसका भी अध्ययन कराया जाएगा। सह समन्वयक डॉ. वंदना झा के अनुसार, अंतर्विषयक शोध भी कराया जाएगा। जिससे कि भूगोल, समाजशास्त्र, इतिहास, कला के साथ ही आईआईटी के छात्र भी अध्ययन केंद्र से जुड़कर शोध कार्य कर सकें। इसमें मिथिला की भौगोलिक स्थिति, सामाजिक दृष्टिकोण, कला, संस्कृति, ऐतिहासिक महत्व को जोड़ा जाएगा।
इन विषयों पर होगा शोध
नदी साहित्य
मिथिला में कोसी, कमला, गंडकी, बनारस सहित 15 नदियां मिलती हैं। इसके लाभ और इसकी विभीषिका पर भी अध्ययन होगा।
मिथिला कृषि
मिथिला में कपास की खेती भी होती है। ऐसे में छात्रों को मैथिली में कृषि के बारे में भी बताया जाएगा।
मैथिली खादी
मैथिली के वस्त्रों की भी अपनी एक अलग पहचान है। छात्र मिथिला के वस्त्रों पर भी शोध कर सकेंगे।
मैथिली कला पेंटिंग
मधुबनी पेंटिंग, कला, परंपरा भी शोध का विषय होगा।
इसके अलावा फिल्म, पत्रकारिता, अनुवाद, शब्दकोष निर्माण, पारिस्थितिकी अध्ययन, कृषि संस्कृति का अध्ययन कराया जाएगा।
काशी सदैव से मिथिलावासियों के लिए ज्ञान का केंद्र रही है। मैथिल विद्वानों ने अपनी पांडित्य परंपरा से काशी को समृद्ध किया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के 100 साल से अधिक के सफर में मैथिली को उचित स्थान देने की आवश्यकता थी जिसे पूरा किया गया। मैथिली संस्कृति, भाषा की विरासत जो पूरे देश में फैली है, उसको भी अध्ययन केंद्र के माध्यम से संजोए जाने का प्रयास होगा। - डॉ. वंदना झा, सह समन्वयक, मैथिली अध्ययन केंद्र