चंदौली जिले के सैयदराजा निवासी 40 वर्षीय एक मरीज को मुंह में छाला था। बीएचयू के रेडियोथेरेपी विभाग में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने फरवरी के दूसरे सप्ताह में फिजियोथेरेपी कराने को कहा और अस्पताल में भर्ती वाले पर्चे पर निजी हॉस्पिटल के पीएमआर विभाग का नाम लिखकर वहां जाने को कहा। जबकि फिजियोथेरेपी बीएचयू में ही हो रही है।
कैंसर के मरीज को थेरेपी के लिए लिखी गई पर्ची
केस-2
नौबतपुर निवासी 51 वर्षीय महिला पेट में दर्द से परेशान थी। परिजन जनवरी में बीएचयू लेकर आए। यहां डॉक्टर ने पेट स्कैन कराने को कहा। यह भी बताया कि बीएचयू में यह जांच नहीं होती है। ऐसे में महामना कैंसर संस्थान के साथ ही निजी हॉस्पिटल में जाने की सलाह दी। परिजनों के अनुसार बीएचयू में यह जांच होती तो ज्यादा राहत होती।
बोले अधिकारी
आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने कहा कि रेडियोथेरेपी विभाग के डॉक्टर के मरीजों को निजी अस्पताल भेजा जाना गलत है। इसके लिए विभागाध्यक्ष से बातकर इसको तत्काल प्रभाव से रोका जाएगा। पेट स्कैन जांच की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय स्तर से पहल की जाएगी।