जल में खड़े होकर भगवान सूर्य का तेज ग्रहण करते हैं व्रती
चंद्रमा जल और सूर्य अग्नि का कारक होता है। व्रती जल में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। पुराणों के अनुसार चंद्र और सूर्य के मिलने से ही सृष्टि की उत्पत्ति हुई है। यह समवेत स्वरूप फलदायक होता है। व्रती जल में खड़े होकर भगवान सूर्य का तेज ग्रहण करते हैं।
उपवास से मिलती है राहत
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के शारीर क्रिया विभाग के प्रो. अजय का कहना है कि उपवास बहुत से रोगों का इलाज है। कार्तिक मास में शरद ऋतु के दौरान शरीर में पित्त की प्रधानता हो जाती है। रोगियों को उपवास की सलाह दी जाती है। इससे शरीर में पित्त उत्पादन की क्षमता कम हो जाती है। पेट की समस्याओं से राहत मिलती है। व्रत और उपवास स्वास्थ्य के लिहाज अच्छे साबित होते हैं।
ये हैं कठिन व्रत
-करवाचौथ
करवाचौथ की शुरूआत सूर्योदय के पूर्व शुरू होकर चंद्रोदय तक चलता है। महिलाएं निराजल रहकर पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। करवा चौथ का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
हरितालिका तीज- 24 घंटे का व्रत
-हरितालिका तीज का व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। कड़े नियमों को चलते इसे सबसे ज्यादा कठिन व्रत माना जाता है। व्रत के दौरान महिलाएं बिना अन्न और जल ग्रहण किए 24 घंटे तक रहती हैं। व्रत के दौरान रात में जागरण किया जाता है।
निर्जला एकादशी
निर्जला एकादशी का व्रत करना पूरे साल की एकादशी के व्रत के समान है। इसमें सूर्योदय के बाद और अगले दिन सूर्योदय तक अन्न-जल ग्रहण नहीं करते हैं। ज्येष्ठ मास में शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी के रूप में मनाते हैं।
नवरात्र
नवरात्र का व्रत चैत्र और शारदीय माह में रखा जाता है। नौ दिन तक चलने वाले व्रत में कुछ लोग पूरे नौ दिन अन्न ग्रहण नहीं करते हैं। कुछ लोग नौ दिन नमक नहीं खाते, तो कुछ लोग मीठे का त्याग करते हैं। कई लोग सिर्फ एक फल से भी पूरे नौ दिन व्रत करने का संकल्प लेते हैं।