धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से हर मनोकामना पूरी होती है। खरना के दिन महिलाएं और व्रती सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनती हैं और नाक से मांग तक का पीला सिंदूर लगाती हैं। शाम के समय सूर्य भगवान की पूजा करने के बाद सूर्य देव और छठी मइया को साठी के चावल की खीर, पूड़ी, मिठाई और केले का भोग लगाया जाता है। केवल साठ दिनों में तैयार होने वाले चावल को साठी चावल कहा जाता है। साठी चावल अधिक गुणकारी माने जाते हैं। साठी चावल संग्रहणी, पेचिश और मंदाग्नि (भूख कम लगना) आदि को समाप्त करता है।
खरना आज
छठ पर्व का दूसरे दिन खरना है। इस दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी तिथि का मान सुबह नौ बजकर 53 मिनट मिनट, पश्चात षष्ठी तिथि है। इस दिन उत्तराषाढ़ नक्षत्र दिन भर और रात को एक बजकर 22 मिनट तक, इसके बाद श्रवण नक्षत्र और शूल तदुपरि वृद्धि नामक योग है। पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, व्रती महिलाएं शनिवार को निर्जल खरना व्रत रखेंगी। शाम को स्वच्छ स्थान पर चूल्हे को स्थापित कर अक्षत, धूप, दीप और सिंदूर से पूजा करेंगी। आटे से रोटी और साठी के चावल से खीर बनाएंगी। इसके बाद खरना किया जाएगा। यही रोटी और खीर खाने के बाद छठ व्रत शुरू हो जाएगा, जो सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद संपन्न होगा।