हरिशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में जाएंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। मंदिरों में जप-तप अनुष्ठान के साथ ही भगवान विष्णु की आराधना होगी। भक्त गुरु के आदेश पर चातुर्मास में अभीष्ट की सिद्धि के लिए प्रिय वस्तुओं का त्याग करेंगे।
17 जुलाई को हरिशयनी एकादशी से चातुर्मास के अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। आदिकेशव मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि चातुर्मास के दौरान भगवान आदिकेशव के आरती और भोग में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। नियमित रूप से होने वाली आरती और भोग भगवान को अर्पित किए जाएंगे।
गोपाल मंदिर के अतुल शाह ने बताया कि भगवान के चार महीने विश्राम के दौरान हम लोग भी यम नियम और संयम का पालन करते हैं। इन चार महीने के दौरान हम लोग अपनी कोई न कोई प्रिय चीज का त्याग कर देते हैं। कुछ लोग अपनी बुरी आदतों को त्यागने का संकल्प लेते हैं और चार महीने तक इसका पालन करते हैं।