इससे विभागाध्यक्ष के साथ ही कई शिक्षक, कर्मचारी बाहर नहीं निकल सके। संकाय प्रमुख भी विभाग में पहुंच गए। वह भी यहीं बैठे रहे। विभागाध्यक्ष ने कई बार बाहर जाने की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने नहीं निकलने दिया। उन्होंने इसकी सूचना चीफ प्रॉक्टर को दी। चीफ प्रॉक्टर ने बातचीत कर छात्रों को धरना समाप्त करने की बात कही, लेकिन छात्र नहीं माने। करीब साढे़ 10 बजे चीफ प्रॉक्टर ने प्रकरण में उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया, तब छात्र शांत हुए।
शोध प्रवेश की पूरी प्रक्रिया विश्वविद्यालय के नियमानुसार की गई है। छात्रों ने क्यों बंधक बनाया, मुझे भी समझ नहीं आ रहा है। मेरे साथ संकाय प्रमुख सहित अन्य शिक्षक, कर्मचारी भी विभाग में ही बंद रहे। छात्र प्रवेश प्रक्रिया निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। चीफ प्रॉक्टर को सूचना दे दी गई थी।
- प्रो. अशोक उपाध्याय, विभागाध्यक्ष
छात्रों और विभागाध्यक्ष से बातचीत के बाद मामला शांत हो गया। छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है। - प्रो. आनंद चौधरी, चीफ प्रॉक्टर