बिड़ला हॉस्टल और एलबीएस हॉस्टल के छात्रों के बीच मारपीट
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देर रात बिड़ला हॉस्टल और एलबीएस हॉस्टल के छात्रों के बीच मारपीट क्यों हुई, इसका कारण साफ नहीं है। घटना के समय मौजूद लोगों में कोई बर्थडे पार्टी को लेकर मारपीट होने की बात कह रहा था तो कुछ लोग भारत पाकिस्तान मैच के दौरान आपसी नोकझोंक को वजह बता रहे थे। जिस समय यह घटना हुई, उस समय वहां छात्रावास से जुड़े अधिकारी भी मौजूद नहीं थे।
करीब 12 बजे बिड़ला हॉस्टल के पास यह घटना हुई। पहले आपस में किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। बाद में विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों तरफ से मारपीट हो गई। इसमें पांच से अधिक छात्र घायल हो गए। सूचना पाकर मौके पर एसीपी भेलूपुर समेत तीन थानों की फोर्स भी विश्वविद्यालय पहुंच गई।
बीएचयू कैंपस में मारपीट की सूचना पर पहुंची पुलिस
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चीफ प्रॉक्टर प्रो. अभिमन्यु सिंह भी घटना स्थल पर पहुंचे और छात्रों को मनाने का प्रयास किया लेकिन छात्र बिना कार्रवाई के निर्णय के हटने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि परिसर में बाहरी छात्रों ने आकर मारपीट की। उधर एसीपी भेलूपुर भी धरनारत छात्रों को मनाने में जुटे रहे। छात्रों का एक गुट सड़क पर धरना शुरू कर दिया तो वहीं दूसरा गुट चीफ प्रॉक्टर के ऑफिस पहुंचा। सभी प्रदर्शन और बीएचयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
दोनों गुट की मांग थी कि हमलावार छात्रों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। पुलिस उन्हें समझाने की कोशिश में लगी रही लेकिन छात्र किसी की बात सुनने के लिए तैयार नहीं थे। इसके बाद पुलिस फोर्स ने अपनी पूरी ताकत के साथ छात्रों को घटनास्थल से हॉस्टल के अंदर की ओर खदेड़ दिया। उसके बावजूद छात्र बार-बार बाहर निकलकर बवाल करते रहे।
इसके बाद पुलिस ने छात्रों को लाठी फटकार कर भगाया और हॉस्टल के अंदर किया। तब जाकर माहौल शांत हुआ। लेकिन माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है। पुलिस अधिकारी और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के लोग अभी मामले को कंट्रोल करने में लगे हुए हैं। विश्वविद्यालय में जल्द ही नये सत्र की कक्षाएं शुरू होनी हैं।
बीएचयू परिसर में देर रात तक बवाल
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महामना की बगिया यानी बीएचयू में आए दिन बवाल होता है। इस अशांति के लिए जिम्मेदार कौन है और उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती इस पर बीएचयू प्रबंधन हमेशा मौन रहता है। विश्वविद्यालय परिसर का माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों सहित अन्य अधिकारियों के पास है।
ये अधिकारी हर बार विफल रहते हैं। उनकी भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं और बीएचयू प्रबंधन घटनाओं को रूटीन मानकर चुप्पी ओढ़ लेता है। जब भी माहौल अशांत होता है विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और हॉस्टलों से जुड़े अधिकारी भी सामने नहीं आते। इसे लेकर अब तक कई बार पुलिस के आला अधिकारी आपत्ति जता चुके हैं।
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