श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से मंदिर और उसके आस-पास हो रहे विकास कार्यों को ‘मूर्ति तोड़ योजना’ करार देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विरोध स्वरूप 12 दिनों का उपवास शुरू कर दिया है।
उन्होंने यह आरोप लगाया है कि इससे पहले भी सदियों से वाराणसी में विकास कार्य हुए लेकिन इस तरह मंदिरों और मूर्तियों को निशाना नहीं बनाया गया। यह कहीं से भी जायज नहीं और संत समाज के लोग इसका पूर्ण विरोध करते हैं।
हम सभी सनातनधर्मी शास्त्रों को मानते हैं, उसके अनुसार अपने जीवन का निर्वहन करते हैं, जिस कारण हमने 12 दिन का पराक व्रत रखा है। इसमें हम सिर्फ जल ग्रहण करेंगे आवश्यकता पर औषधि अपवाद होगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंदिर प्रशासन से प्रश्न किया है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर मंदिरों को तोड़े बिना क्यों नहीं बन सकता है? ऐसा लगता है कि यह मूल रूप से मंदिर तोड़ योजना ही है, अन्यथा इतना बड़ा अनर्थ विकास के नाम पर नहीं किया जा सकता था।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बेवजह मंदिरों को तोड़कर और मूर्तियों को नुकसान पहुंचा कर इस योजना को कोई भी मुकाम नहीं मिलेगा। मंदिर तोड़ने से व्यवधान ही उत्पन्न होगा और इसका हम हर संभव विरोध करेंगे।
इससे पहले काशी में विगत शताब्दी में हुए विकास कार्यों पर अगर नजर डाली जाए तो काशी हिंदू विश्वविद्यालय, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ, डीजल रेल इंजन कारखाना, कैंट रेलवे स्टेशन, छावनी एरिया, ट्रामा सेंटर आदि की गिनती की जा सकती है, पर इनमें से किसी के निर्माण में मंदिर नहीं तोडे़ गए।