भोले की नगरी में अन्नकूट महोत्सव की छटा देश दुनिया से आए श्रद्धालुओं, पर्यटकों के लिए यादगार बन गई। अन्न, मेवा से बने पकवानों, मिठाइयों के भंडार सजाए गए। तीनों लोक के स्वामी बाबा विश्वनाथ के दरबार में घी के लड्डुओं का शिवालय का दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे, तो मां अन्नपूर्णा के धाम में अन्न का पहाड़ सजाया गया। शहर के अन्य मंदिरों में भी अन्नकूट की छटा देखने के लिए श्रद्धालु देर रात तक उमड़ते रहे।
मंगला आरती के बाद बाबा विश्वनाथ के दरबार में सजे लड्डुओं के शिवालय का दर्शन भोर चार बजे से आरंभ हो गया। अन्नकूट की झांकी दर्शन के लिए लंबी कतार लगी। शिवालय के द्वार पर लड्डुओं से ही श्रीराम लिखा हुआ था।
गर्भगृह में छप्पन भोग के अलावा मेवा, मिश्री, पकवान का भोग अर्पित किया गया। इसी तरह अन्नपूर्णा मंदिर में 80 कुंतल वजन की मेवा, फल और खोवा, छेना से बनी मिठाइयों का अन्नकूट सजाया गया। 11 कुंतल कच्चे भोग यानी चावल, दाल, तरह-तरह की सब्जियां, चटनी, अचार, पापड़ के रूप में अन्न का पहाड़ सजाया गया।
यहां पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अन्नकूट का भोग-प्रसाद मंदिर परिसर के अन्नक्षेत्र में ग्रहण किया। अन्न से बनाए गए पर्वत को प्रसाद के रूप में पाने की दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं में होड़ मची रही। अन्नकूट के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।