इस बार यह आंकड़ा शत-प्रतिशत करना है। इसमें यह ध्यान रखना है कि विपक्ष में मजबूत छवि वाले प्रत्याशियों की घेराबंदी बहुत जरूरी है। इसके लिए वहां प्रचार के तरीके में बदलाव के साथ आक्रामक प्रचार की जरूरत होगी। विधानसभा क्षेत्रों में जातीय समीकरणों को समझा जाए और भाजपा के नेताओं के कार्यक्रम तय कराए जाएं।
शाह ने एक-एक सीट पर प्रत्याशी की जीत की संभावनाओं के साथ जातिगत समीकरण, सरकार के काम-काज के प्रभाव और इन क्षेत्रों में मतदाताओं पर किस नेता का प्रभाव आदि की सूची बनाने का निर्देश दिया।
उन्होंने वर्ष 2017 और वर्ष 2019 के अनुभवों के आधार पर हिंदू मतों को जाति में नहीं बंटने देने के लिए भाजपा के मुद्दों को बूथ तक पहुंचाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में काशी में भाजपा के दिग्गज पहुंच जाएंगे और उनकी उपयोगिता के हिसाब से उनके कार्यक्रम मांगे जाएं।
शाह ने सहयोगी दलों के साथ मजबूती से खड़े होने के साथ ही उनकी मदद लेने का निर्देश दिया। उन्होंने अपना दल एस और निषाद पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में उनके नेतृत्व के कार्यक्रम प्रस्तावित करने को कहा। इसके साथ ही जिन विधानसभा क्षेत्रोें में सहयोगी दल के प्रत्याशी हैं, वहां अपने कार्यकर्ता पूरे मनोयोग से जुटे, यह भी ध्यान रखें।
पूर्वांचल को साधने के लिए गृहमंत्री अमित शाह का तीसरे दिन काशी में प्रवास होगा। 28 फरवरी तक वे दो बार और यहां आएंगे। इसके बाद एक मार्च से शाह काशी को केंद्र बनाकर ही पूर्वांचल के दौरे करेंगे।
इसके साथ ही वे भाजपा के स्टार प्रचारकों को भी चुनाव प्रचार का मंत्र देते रहेंगे। पूर्वांचल में निषाद और कुर्मी मतदाताओं को साधने के लिए निषाद पार्टी व अपना दल (एस) के नेताओं की जगह-जगह सभाएं कराई जाएंगी।